भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) ने 18 साल पुराने एक मामले में टाटा मोटर्स लिमिटेड को बड़ी राहत दी है। इसके साथ ही आगे से डील्स को लेकर अधिक सावधानी बरतने की भी चेतावनी दी है।
क्या कहा सेबी ने: सेबी का कहना है कि इस समय कंपनी के खिलाफ कोई भी आदेश देने से 18 साल पुराने हुई घटना की भरपाई नहीं होगी। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य एस के मोहंती ने अपने 54 पृष्ठ के आदेश में कहा, ‘‘18 वर्ष पहले हुई घटना के लिए टाटा मोटर्स के खिलाफ इस समय कोई आदेश पारित करना बेशक मान्य होगा लेकिन इससे उद्देश्य पूरा नहीं होगा।’’
बाजार नियामक के मुताबिक इस मुद्दे को लाने वाली टाटा फाइनेंस (टीएफएल) का 17 साल पहले ही टाटा मोटर्स के साथ विलय हो गया है। इसलिए अब कोई मामला ही नहीं बनता।
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इसके अलावा बाजार नियामक ने निसकल्प इंफ्रास्ट्रक्टर सर्विसेज (पूर्व में निसकल्प इन्वेस्टमेंट एंड ट्रेडिंग लिमिटेड) को भी भविष्य में कारोबार करने में अधिक ध्यान देने की चेतावनी दी है।