नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मामले ने पूरे कॉरपोरेट जगत को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इस बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि किसी भी कंपनी में टॉप मैनेजमेंट के पद पर एक ही व्यक्ति को लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए।
सेबी के पूर्व चेयरमैन एम. दामोदरन का मानना है कि एनएसई की घटना के बाद कॉरपोरेट्स जगत को कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले यह ध्यान रखना चाहिए जब एक या दो व्यक्ति टॉप मैनेजमेंट पदों पर सालों तक कार्यरत रहते हैं, तो आगे चलकर मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। इसे हर कंपनियों को समय रहते हल कर लेना चाहिए।
इन चीजों पर भी रखें ध्यान
एम. दामोदरन का कहना है कि बोर्ड के एक गैर-कार्यकारी सदस्य के रूप में सीईओ या एमडी की नियुक्ति होती है। कई मामलों में यह प्रक्रिया नए नियुक्त हुए एमडी को उपलब्ध कराए गए अधिकारों या शक्तियों में अड़ंगा डालने का काम करता है। इससे भी बड़ी समस्या यह है कि जब पूर्व और वर्तमान दोनों पदाधिकारी मिलकर काम करते हैं और संगठन को एक व्यक्तिगत जागीर की तरह चलाते हैं तो वे बाकी बोर्ड के साथ जानकारी साझा करना जरूरी नहीं समझते। साथ ही कॉर्पोरेट संस्थाओं में बोर्ड की भूमिका को महत्व नहीं देते हैं। इसलिए बोर्ड में लेने से पहले उसके पिछले ट्रैक रिकार्ड और उसकी उपलब्धियों पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि एनएसई मामले ने देखा गया कि कैसे बोर्ड भी रेगुलेटर से सही समय पर सूचनाएं नहीं दे रही थी। ऐसे में रेगुलेटर को सही सही जानकारी साझा न करना एक अलग से दंडनीय अपराध के रूप में माना जाना चाहिए।