मोदी सरकार द्वारा कुछ तिलहन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बढ़ाए जाने के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को सरसों, मूंगफली, सोयाबीन तेल-तिलहन, बिनौला, सीपीओ और पामोलीन तेल सहित अधिकांश तेल-तिलहनों की कीमतें तेजी दर्शाती बंद हुईं। वहीं, इंदौर के दाल चावल बाजार में बुधवार को चना की दाल 150 रुपये, तुअर (अरहर) की दाल 200 रुपये, मूंग की दाल 100 रुपये और उड़द की दाल के भाव में 100 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी हुई।
दिल्ली मंडी में बुधवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे
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इंदौर में सोयाबीन रिफाइंड के भाव में तेजी
तिलहन
तेल
कपास्या खली
इंदौर में चने की दाल, तुअर दाल, मूंग, उड़द में तेजी
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सोयाबीन का एमएसपी 350 रुपये बढ़ा
बाजार सूत्रों ने बताया कि शिकॉगो एक्सचेंज लगभग 1.5 प्रतिशत तेज था, जबकि मलेशिया एक्सचेंज में गिरावट का रुख होने के बावजूद खाद्य तेलों के भाव तेज बने हुए हैं। सूत्रों ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2022-23 के खरीफ (गर्मी) की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि की है और इसमें विभिन्न तिलहन फसलों के मूल्य में भी वृद्धि की गई है। यह सरकार का सराहनीय कदम है और इससे तिलहन उत्पादन बढ़ने की संभावना बनती है। इस वृद्धि के तहत सोयाबीन का एमएसपी 350 रुपये या नौ प्रतिशत बढ़ाया गया है।
सूरजमुखी का एमएसपी 385 रुपये क्विंटल बढ़ा
सूरजमुखी का एमएसपी 385 रुपये क्विंटल यानी छह प्रतिशत, मूंगफली का एमएसपी पांच प्रतिशत यानी 300 रुपये बढ़ाया गया है। इसके अलावा भी अन्य फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी की गई है। इससे न केवल तिलहन उत्पादन में देश आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ेगा बल्कि खाद्य तेलों के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी।
मंडियों में निरंतर घट रही सरसों की आवक
मंडियों में सरसों की आवक निरंतर घट रही है। आयातित तेलों की कमी को पूरा करने के लिए सरसों का रिफाइंड बनाने के लिए इसकी चौतरफा मांग है, लेकिन जिस तरह से सरसों रिफाइंड की खपत हो रही है, उसे देखते हुए आगे जाकर सरसों की कमी होना निश्चित है और इस कमी को आयात शुल्क कम करके या अन्य देशों से आयात कर पूरा नहीं किया जा सकता।