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GST पर ‘सुप्रीम’ फैसला, काउंसिल की सिफारिशें मानने के लिए केन्द्र और राज्य बाध्यकारी नहीं

जीएसटी काउंसिल की सिफारिशों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ा फैसला दिया है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि जीएसटी काउंसिल की सिफारिशें केन्द्र और राज्य सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं है। यानी, केन्द्र सरकार और राज्य सरकारें जीएसटी काउंसिल की सिफारिशों के विपरीत भी फैसले ले सकती हैं। बता दें, यह फैसला डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया है। 

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केन्द्र और राज्य दोनों बना सकते हैं कानून 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आज के फैसले में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि केन्द्र और राज्य सरकार दोनों जीएसटी के मामलों पर कानून बना सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जीएसटी काउंसिल की सिफारिशें सहयोगात्मक चर्चा का नतीजा होता है। संघीय व्यवस्था में यह जरूरी नहीं कि किसी एक पास हमेशा उच्च स्तर हो। जीएसटी काउंसिल को समाधान देने के लिए सामंजस्य बैठाते हुए काम करना चाहिए।

अदालत ने कहा है कि GSCT में कोई ऐसा प्रावधान नहीं है जिसमें उन परिस्थितियों का समाधान हो जब केन्द्र और राज्यों द्वारा बनाए गए कानून में विभिन्नता हो। अगर ऐसी कोई परिस्थिति आती है तो जीएसटी काउंसिल उन्हें उचित सलाह देती है। 

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बता दें, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला गुजरात हाई कोर्ट के 2020 के फैसले को बरकार रखते हुए आया है। तब गुजरात हाई ने अपने फैसले में रिवर्स चार्ज के तहत समुद्री माल आयतकों पर IGST लगाने को रद्द कर दिया था।

ऑनलाइन गेम, कसीनो पर देना पड़ सकता है 28% जीएसटी 

मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की अगुवाई वाली मंत्रियों के समूह ने कसीनो, रेस कोर्स ऑनलाइन गेमिंग को 28% जीएसटी का दायरे में लाने को लेकर आम सहमति बन गई है। यह रिपोर्ट एक दो दिन के अंदर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंप दी जाएगी। जिसके बाद इसे अगले जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में रखा जाएगा।

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