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GST के 6 सालः अब तक तीन लाख करोड़ की टैक्स चोरी, मासिक राजस्व 1.50 लाख करोड़ के पार

देश में सबसे बड़े अप्रत्यक्ष कर सुधार के तहत माल एवं सेवा कर (GST) को लागू हुए छह साल पूरे हो चुके हैं। अब 1.5 लाख करोड़ रुपये का मासिक राजस्व एक तरह से सामान्य हो चुका है। देश में 31 मई 2023 तक 1.39 करोड़ रजिस्टर्ड जीएसटी करदाता हैं। 112 करोड़ कुल रिटर्न दाखिल किए जा चुके हैं और 
370 करोड़ ईवे बिल जनरेट किए जा चुके हैं। हालांकि, कर प्रणाली में धोखाधड़ी के नए तरीके भी आजमाए जा रहे हैं, लेकिन कर अधिकारी उनसे निपटने की कोशिश में लगे हुए हैं।

मासिक राजस्व 1.50 लाख करोड़ के पार

देशव्यापी एकसमान कर प्रणाली के रूप में जीएसटी एक जुलाई, 2017 को लागू की गई थी। इसमें उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट और 13 उपकर जैसे 17 स्थानीय शुल्क शामिल थे। जीएसटी लागू होने के छह साल के भीतर मासिक कर राजस्व बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये के पार जा पहुंचा है। अप्रैल 2023 में राजस्व 1.87 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। वहीं, शुरुआती दौर में औसत मासिक राजस्व 85,000 से 95,000 करोड़ रुपये हुआ करता था।

अब तक तीन लाख करोड़ की टैक्स चोरी

जुलाई, 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक फर्जी तरीकों से करीब तीन लाख करोड़ रुपये की टैक्स चोरी होने का अनुमान है। इसमें से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक टैक्स चोरी पिछले वित्त वर्ष 2022-23 में ही की गई है। वित्त वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा 54,000 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2022-23 में टैक्स चोरी के करीब 14,000 मामले दर्ज किए गए, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 12,574 था।

टैक्स चोरी में शामिल 11 हजार संस्थाओं का पता लगाया

फर्जी जीएसटी पंजीकरण से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के जरिए टैक्स चोरी में शामिल कंपनियों के खिलाफ केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा-शुल्क बोर्ड (CBIC) ने दो महीने का विशेष अभियान चलाया है। इसके तहत अब तक जीएसटी रजिस्ट्रेशन लेने वाली लगभग 11,000 से अधिक संस्थाओं को फर्जी पाया गया है। ये संस्थाएं करीब 15,000 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी में शामिल पाई गई हैं। बोर्ड ने यह अभियान 16 मई से शुरू किया था, जो 15 जुलाई तक जारी रहेगा।

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नई तकनीकी का इस्तेमाल: फर्जी कंपनियां बनाने वालों की धरपकड़ के लिए जीएसटी अधिकारियों ने डेटा एनालिटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करना शुरू किया है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड के डाटा विश्लेषण के साथ ही अन्य विभागों से मिली महत्वपूर्ण जानकारियों और डाटा विश्लेषण के आधार पर हजारों संदिग्ध कंपनियों की पहचान की जा चुकी है। साथ ही जीएसटी रिटर्न के अतिरिक्त सत्यापन की भी तैयारी की जा रही है। इस तरीके से जीएसटी चोरी करने वालों पर शिकंजा कसने में मदद मिल रही है।

इन पर फैसले होना बाकी

केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली जीएसटी परिषद की सितंबर 2016 में स्थापना के बाद से अब तक 49 बैठकें हो चुकी हैं। यह नीतिगत मुद्दों और जीएसटी दर के बारे में निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था है। कर विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी परिषद को कई मुद्दों पर अभी फैसला लेना बाकी है। जीएसटी कर की दरों और स्लैब को तर्कसंगत बनाने, पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन पर जीएसटी लगाने जैसे मुद्दों पर अब तक कोई फैसला नहीं हो पाया है। ऑनलाइन गेमिंग, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लेनदेन, ईवी चार्जिंग बुनियादी ढांचे और जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण की स्थापना जैसे मुद्दों पर अभी स्पष्टता आने का इंतजार है।

छह माह में आया राजस्व (करोड़ रुपये में)

  • दिसंबर 2022  में 1,49,507
  • जनवरी 2023 में 1,57,554
  • फरवरी 2023 में 1,49,577
  • मार्च 2023 में 1,60,122
  • अप्रैल 2023 में 1,87,035
  • मई 2023 में 1,57,090
  • क्यों बढ़ रहा जीएसटी कलेक्शन

  • -भारत में मजबूत मांग और खपत
  • -सेवा और विनिर्माण क्षेत्र में तेजी
  • -ई-इन्वॉइसिंग में बढ़ोतरी
  • -विनियामक अनुपालन में इजाफा
  • -नए करदाताओं में बढ़ोतरी
  • -डिजिटलीकरण एवं पारदर्शिता
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