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Google जैसे समाचार मध्यस्थों पर कनाडा की नकेल, बूस्ट होंगे भारतीय न्यूज पेपर्स और इनके डिजिटल संस्करण

Google जैसे समाचार मध्यस्थों पर हाल ही में कनाडा के एक आदेश दिया है, जिससे भारतीय समाचार पत्रों और इसके डिजिटल समाचार संस्करणों को Google द्वारा अपनी समाचार सामग्री के एकाधिकार शोषण के खिलाफ उनकी लड़ाई में एक बड़ी ताकत दिया है।

प्रमुख भारतीय समाचार पत्र और इसके डिजिटल संस्करण Google द्वारा अपने एकाधिकार और स्थिति के कथित दुरुपयोग के खिलाफ प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। समाचार पत्रों के सूत्रों के अनुसार, Google इन समाचार पत्रों के डिजिटल संस्करणों द्वारा उत्पन्न सामग्री पर भारी मात्रा में विज्ञापन राजस्व कमाता है। हालांकि, इस संबंध में Google द्वारा कोई उचित भुगतान वापस या राजस्व का बंटवारा नहीं किया गया है, जिससे भारत में समाचार प्रकाशकों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। 


फेसबुक की मालिकाना कंपनी मेटा और गूगल द्वारा समाचार प्रकाशकों के कंटेंट का उपयोग कर कमाए राजस्व में प्रकाशकों को उनका हिस्सा देने के लिए कई देशों में ऑनलाइन न्यूज एक्ट बनाया जा रहा है। यह लागू होने पर टेक कंपनियों को समाचार प्रकाशकों से राजस्व साझा करना होगा।  फ्रांस, यूरोपीय यूनियन के कई देश अमेरिका और ब्रिटेन भी ऐसा कानून बना रहे हैं। 

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 कैनेडियन ऑर्डर के अनुसार, डिजिटल समाचार मध्यस्थों को विनियमित करने के इरादे से एक ऑनलाइन समाचार अधिनियम बनाया गया है ताकि कनाडाई डिजिटल समाचार बाज़ार में निष्पक्षता को बढ़ाया जा सके। यह अधिनियम उन डिजिटल समाचार मध्यस्थों और Google जैसे दिग्गजों पर लागू होता है, जिनके पास समाचार व्यवसायों पर एक महत्वपूर्ण सौदेबाजी शक्ति असंतुलन है, जो कुछ कारकों पर निर्भर करता है, जैसे कि क्या मध्यस्थ एक प्रमुख बाजार स्थिति में है। आदेश में मध्यस्थ द्वारा उपलब्ध कराई गई खबरों के लिए समाचार व्यवसायों को उचित मुआवजे के प्रावधान की परिकल्पना की गई है।

नियम यह सुनिश्चित करेगा कि फेसबुक और गूगल जैसे प्लेटफॉर्म वाणिज्यिक सौदों पर बातचीत करें और समाचार प्रकाशकों को उनकी सामग्री के लिए उचित भुगतान करें। गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल एक अभूतपूर्व कानून भी पारित किया था। कानून ने Google और Facebook के लिए अपने प्लेटफॉर्म पर सामग्री के लिए मूल समाचार प्रकाशकों को भुगतान करना अनिवार्य कर दिया है।

बता दें भारत में प्रमुख समाचार पत्रों और डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) ने गूगल के एकाधिकार के खिलाफ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के समक्ष यह मामला रखा है। सीसीआई में मामले रखने वालों में सभी प्रमुख भारतीय समाचार प्रकाशक शामिल हैं। इनमें हिंदुस्तान टाइम्स, अमर उजाला, जागरण न्यू मीडिया, दैनिक भास्कर, इंडिया टुडे, इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, इनाडु, मलयालम मनोरमा, एबीपी नेटवर्क, जी मीडिया, मातृभूमि, हिंदू, एनडीटीवी, लोकमत, एक्सप्रेस आदि प्रमुख हैं। सीसीआई ने शिकायत मिलने पर सात जनवरी को महानिदेशक को जांच के आदेश दिए थे। आयोग में बताया गया कि न्यूज वेबसाइटों का करीब 50 फीसद ट्रैफिक गूगल से आता है। उसने एल्गोरिथम से सर्च परिणाम में तय करना शुरू कर दिया है कि कौन सी वेबसाइट पहले नजर आएगी व कौन सी बाद में। यह स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा के नियमों का उल्लंघन है। डिजिटल विज्ञापनों में भी वह सबसे बड़ा हिस्सेदार है। प्रकाशकों के पेज पर आए विज्ञापनों की कीमत वही तय कर रहा है। प्रकाशकों के कंटेंट के लिए जो यूजर्स इंटरनेट पर आते हैं, उनसे हासिल विज्ञापनों में भी बड़ा हिस्सा गूगल रखता है।


उम्मीद है कि सर्च इंजन पर परिणामों से छेड़छाड़ रुकेगी। इनसे स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा को बचाया जा सकेगा। गूगल पर आरोप लगते रहे हैं कि उसका इंटरनेट सर्च इंजन बनावटी परिणाम और फेक न्यूज दिखाकर नकारात्मक धारणा खड़ी कर सकता है।

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