EPF: जब कोई कर्मचारी 58 वर्ष की आयु तक पहुंचता है, तो उसका ईपीएफ खाता परिपक्व हो जाता है। यदि कोई कर्मचारी लगातार 60 दिनों तक बेरोजगार रहता है, तो उसके ईपीएफ खाते की राशि का कर्मचारी को पूरा भुगतान किया जाता है और वह राशि टैक्स-फ्री होती है। हालांकि, अगर कर्मचारी नौकरी के दौरान परिपक्व होने से पहले राशि निकाल लेता है, तो स्रोत पर कर कटौती (TDS) लागू होगी।
वैसे तो पीएफ खाता खुलवाने के 5 साल के भीतर इससे निकासी करने पर TDS काटा जाता है, लेकिन इसके अलावा भी कई मौके होते हैं जब आपको TDS देना पड़ता है। आइए जानते हैं कब और किन परिस्थिति में TDS कटता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
टीडीएस क्या है?
‘टीडीएस’ का मतलब ‘टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स’ है। यानि आय के स्त्रोत पर जो टैक्स कटौती कटता है वही टीडीएस है। टीडीएस टैक्स चोरी पर नियंत्रण रखने में मदद करता है। टीडीएस विभिन्न प्रकार के राजस्व पर लगाया जाता है, जिसमें वेतन, ब्याज, कमीशन, लाभांश आदि शामिल हैं।
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जानें कब ईपीएफ पर टीडीएस कटता है और कब नहीं
— एक खाते से दूसरे खाते में पीएफ फंड ट्रांसफर।
— किसी सदस्य की बीमारी के कारण सेवा की समाप्ति या कंपनी छोड़ने के बाद हुई निकासी पर।
— अगर कोई कर्मचारी पांच साल की अवधि के बाद अपना पीएफ निकालता है।
— यदि फॉर्म-15जी/15एच जमा नहीं किया जाता है लेकिन पैन जमा किया जाता है तो टीडीएस 10% की दर से काटा जाएगा।
— यदि कोई कर्मचारी पैन जमा करने में विफल रहता है, तो अधिकतम सीमांत दर (34.608 प्रतिशत) पर टीडीएस काटा जाएगा।
— टीडीएस 1961 के आयकर अधिनियम की धारा 192ए के अनुसार काटा जाता है।
— फॉर्म 15H वरिष्ठ व्यक्तियों (60 वर्ष और उससे अधिक) के लिए है, जबकि फॉर्म 15G उन लोगों के लिए है जिनकी कोई कर योग्य आय नहीं है।
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