टाटा संस के पूर्व चेयरमैन और अरबपति कारोबारी सायरस मिस्त्री का रविवार को निधन हो गया। सायरस मिस्त्री की महाराष्ट्र में पालघर के पास एक सड़क हादसे में मौत हो गई। वैसे तो सायरस लंबे समय से कारोबारी जगत में थे लेकिन उन्होंने तब सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी जब टाटा संस के चेयरमैन बनाए गए।
पहली बार आउटसाइडर बना चेयरमैन: साल 2012 में टाटा समूह के सबसे लंबे समय तक चलने वाले अध्यक्ष रतन टाटा के उत्तराधिकारी के तौर पर सायरस मिस्त्री का चयन हुआ। यह पहली बार था जब टाटा समूह के सबसे बड़े पद पर किसी बाहरी या आउटसाइडर की एंट्री हुई। यह घटना साधारण नहीं थी, क्योंकि 16 माह के मंथन के बार सायरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद के काबिल समझा गया। जिन लोगों को इस पद की खोज की जिम्मेदारी मिली थी उनमें ब्रिटेन के प्रभावशाली कारोबारी-लॉर्ड सुशांत कुमार भट्टाचार्य, प्रतिष्ठित वकील शिरीन भरुचा और एन.ए. सूनावाला थे।
बगावत और कानूनी जंग: साल 2015 के बाद टाटा संस के चेयरमैन सायरस मिस्त्री और टाटा समूह के बीच सबकुछ बिगड़ने लगा था। कई ऐसे मौके आए जब समूह को लेकर रतन टाटा और सायरस मिस्त्री के विचार बेमेल खाते थे। हालात इतने बिगड़े कि 2016 में शेयरहोल्डर्स की वोटिंग के बाद सायरस मिस्त्री को इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद टाटा संस का चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को बनाया गया। हालांकि, इस्तीफा के बाद सायरस ने अलग-अलग अदालतों में हक की लड़ाई लड़ी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया और यहां जीत टाटा ग्रुप की हुई।
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टाटा से पारिवारिक संबंध: यह दिलचस्प है कि सायरस मिस्त्री और रतन टाटा के बीच पारिवारिक रिश्ता है। सायरस, रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा के साले थे। सायरस कही बहन अल्लू की शादी नोएल टाटा से हुई है।