ग्लोबल कंसल्टिंग फर्म केपीएमजी के मुताबिक भारत की मौजूदा नीतियां आने वाले सालों में देश की आर्थिक रफ्तार को बढ़ाए रखेंगी। आकलन के मुताबिक देश में इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए जा रहे फोकस और निवेश की वजह से न सिर्फ देश की आर्थिक रफ्तार बढ़ेगी बल्कि बेरोजगारी भी घटेगी (
पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी, यहां बिक रहा है सबसे सस्ता तेल
2022 में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा। रिजर्व बैंक ने वित्तवर्ष 2022 में भारत की आर्थिक रफ्तार 9.2 फीसदी और वित्तवर्ष 2023 में 7.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।
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4 अच्छे संकेत
1. टीकाकरणः केपीएमजी के मुताबिक सरकारी प्रयासों और तेज कोविड वैक्सीनेशन कार्यक्रम की वजह से भारत तीसरी लहर के असर को रोक पाया है। साथ ही आर्थिक सुधार के मोर्चे पर भी आगे बढ़ रहा है। यही नहीं देश में तमाम मोर्चों- मोबिलिटी इंडेक्स, डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन, बिजली की मांग सभी ऊपर दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
2. बजटीय प्रयासः बजट में केंद्र सरकार की तरफ किए गए ऐलान और मिशन गतिशक्ति भी इस रफ्तार को और आगे बढ़ाएंगे। केपीएमजी के भारत के लिए किए गए आकलन के हिसाब से वित्तवर्ष 2021-22 में भारत की जीडीपी 9.2 और वित्तवर्ष 2022-23 में 7.7 फीसदी रह सकती है।
3. महंगाईः केपीएमजी के मुताबिक वर्तमान और आने वाले वित्तवर्ष के दौरान महंगाई क्रमश: 5.4 और 4.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। हालांकि आरबीआई के सामने महंगाई को नियंत्रण में लाने के लिए ज्यादा विकल्प नहीं हैं।
4. बेरोजगारीः रिपोर्ट के मुताबिक वित्तवर्ष 2021-22 में बेरोजगारी दर घटकर 9.2 फीसदी और उसके अगले वित्तवर्ष में 9.1 रहने की संभावना है। निवेश के अवसर और व्यापार सुगमता बढ़ाकर इस मोर्चे पर कामयाबी पाई जा सकती है।
4 चुनौतियां
1. खुदरा महंगाईः रिपोर्ट में यूक्रेन-रूस के युद्ध से उपजे वैश्विक हालातों की वजह से भारत के लिहाज से देश में बढ़ते पेट्रोल और डीजल के दाम से खुदरा महंगाई में इजाफा पर चिंता जताई गई है। महंगा कच्चा तेल आम आदमी के रोजमर्रा के जीवन पर असर डाल सकता है।
2. चिप संकटः कोरोना की वजह से ऑटो उद्योग सेमीकंडक्टर की किल्लत से जूझ रहा था और रूस-यूक्रेन से आने वाले चिप की आपूर्ति रुकने से बड़ा संकट पैदा हो गया है। इससे इस क्षेत्र में नये निवेश और रोजगार सृजन में बड़ी बाधा उत्पन्न हो सकती है।
3. आयात निर्भरताः कमोडिटी के बढ़ते दामों को भी औद्योगिक क्षेत्र के लिए चुनौती बताया गया है। भारत की कच्चे तेल, नेचुरल गैस और अन्य कमोडिटी पर आयात निर्भरता की वजह से आपूर्ति संकट गहराने आशंका जाहिर की गई है। भारत को इस मामले में वैकल्पिक मार्ग खोजने होंगे।
4. कोरोना की चौथी लहरः रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना की चौथी लहर की अनिश्चितता को भी भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार के लिए एक संभावित खतरे के तौर पर देखा जा रहा है। चीन और यूरोप के कई देशों में कोरोना के नए वेरिएंट का लेकर खबरें आ रही हैं। भारत को इसे लेकर सतर्कता बरतनी होगी।
भारत के लिए आकलन
वित्तवर्ष 2021 2022 2023
जीडीपी -7.3 9.2 7.7
महंगाई 6.2 5.4 4.5
बेरोजगारी दर 10.1 9.2 9.1
स्रोतः सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय, सीएमआईई, केपीएमजी एनालिसिस