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तूर या अरहर दाल की कीमतों में मार्च 2023 तिमाही में तेज उछाल आया है। घरेलू सप्लाई घटने की वजह से अरहर दाल की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है। अक्टूबर में हुई बेमौसम बारिश और किसानों के सोयाबीन, कपास जैसी फसलों की तरफ रुख करने की वजह से प्रॉडक्शन 20-30 पर्सेंट घट सकता है। सेंट्रल पूल में पर्याप्त स्टॉक न होने की वजह से चिंता और बढ़ गई है। इंडस्ट्री ऑफिशियल्स का कहना है कि पिछले 3 महीने में अरहर दाल की कीमतों में 22 पर्सेंट का उछाल आया है। वहीं, पिछले एक साल में अरहर दाल के दाम 32 पर्सेंट से ज्यादा बढ़ गए हैं।
8400-8500 रुपये प्रति क्विंटल के लेवल पर प्राइस
अरहर दाल के सबसे बड़े उत्पादक महाराष्ट्र के प्रमुख होलसेल मार्केट्स में मिल-क्वॉलिटी अरहर दाल 8400-8500 रुपये प्रति क्विंटल के लेवल पर ट्रेड कर रही है। वहीं, इसका मिनिमम सपोर्ट प्राइस 6600 रुपये प्रति क्विंटल है। यह बात स्पॉट मार्केट सूत्रों ने कही है। अकोला के राधा उद्योग के नरेश बियानी का कहना है, ‘अक्टूबर में हुई बारिश ने महाराष्ट्र में तैयार खड़ी अरहर की फसल को नुकसान पहुंचाया, जिससे यील्ड 20 पर्सेंट घट सकती है। इसका सीधा असर इस साल के टोटल प्रॉडक्शन पर पडे़गा।’
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इंडस्ट्री से जुड़े लोग बोले- 2.8 मिलियन टन रह सकता है प्रॉडक्शन
क्रॉप ईयर 2022-23 (जुलाई-जून) में अरहर प्रॉडक्शन घटकर 3.7 मिलियन टन रह सकता है, जो कि पिछले साल 4.2 मिलियन टन था। यह बात एग्रीकल्चर मिनिस्ट्री के सेकेंड एडवांस एस्टिमेट में कही गई है। हालांकि, इंडस्ट्री का मानना है कि साल के लिए आउटपुट 2.7 से 2.8 मिलिटन टन रह सकता है। एग्री टेक कंपनी DeHaat के असिस्टेंट जनरल मैनेजर इंद्रजीत पाल का कहना है, ‘मौजूदा समय में कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे प्रमुख मार्केट में अरहर की रोजाना की सप्लाई 21000 से 25000 क्विंटल है, जो कि जून तक घटकर 10000-12000 क्विंटल पहुंच सकती है। पिछले साल के मुकाबले इस साल सप्लाई 25-30 पर्सेंट कम है।’
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10 पर्सेंट तक और बढ़ सकती हैं कीमतें
एग्री टेक कंपनी ओरिगो कमोडिटीज इंडिया में एग्रीकल्चर रिसर्च के हेड तरुण सत्संगी का कहना है, ‘अरहर दाल की कीमत 8-10 पर्सेंट और बढ़ सकती है और जुलाई-अगस्त तक 9300-9500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकती हैं। जुलाई-अगस्त तक मॉनसूनी बारिश को लेकर स्पष्टता आएगी। कीमतों में तेजी इस बात पर निर्भर करेगी कि अल-नीनो कैसे मॉनसून और अगले साल की खरीफ की बुआई पर असर डालता है।’