कृषि मंत्रालय 27 जेनरिक एग्रो केमिकल पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। इनमें सभी उत्पाद कम लागत वाले जेनेरिक पेस्टिसाइड (कीटनाशक) हैं, जिसका उपयोग पिछले 20-30 सालों से लगातार किया जा रहा है। अगर यह प्रस्ताव पास होता है और प्रतिबंध लगता है तो इससे देश में पौधों की सुरक्षा करने वाले केमिकल की उपलब्धता में कमी आएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि ये घरेलू खपत के करीबन 50 पर्सेंट मॉलिक्यूल में हिस्सेदारी रखते हैं।
खाद्य सुरक्षा स्कीम पर भी पड़ेगा असर
भारत दुनिया में दूसरा सबसे बडा खाद्यान्न निर्यातक है और अगर इस तरह के कदम उठाए जाते हैं तो इसका देश की खाद्य सुरक्षा स्कीम पर भी असर दिख सकता है। खासकर, तब जब लगातार आबादी बढ़ रही है और तमाम खाद्य सुरक्षा की योजनाएं भी चलाई जा रही हैं।
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क्या कहते हैं जानकार
कुछ घरेलू ब्रोकरेज कह कहना है कि जिस तरह से कृषि रसायनों की उपलब्धता अचानक बाधित हो गई थी उसे यह पता चला कि जैसे कहीं कोई सिस्टम ही काम नहीं कर रहा है। वहीं, एक अन्य विदेशी ब्रोकरेज के रिसर्च हेड ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि इस समय दोहरे घाटे को कम करने का कोई मतलब होगा, खासकर तब जब भारत अपने वैश्विक विकल्पों को अनुकूलित करने की कोशिश कर रहा है। एक ऐसे देश से जो पिछले तीन वर्षों में खाद्यान्न के शुद्ध निर्यातक के रूप में उभरा है, और इसके साथ ही विदेशी एक्सचेंज भी लाया है। इस तरह की अव्यवस्था और घरेलू खाद्य में कमी निर्यात पर तुरंत रोक लगा देगी।
कृषि सेक्टर का जीडीपी में 18 पर्सेंट योगदान
भारत का कृषि सेक्टर देश की जीडीपी में 18 पर्सेंट और मर्चेंडाइज निर्यात में 14 पर्सेंट का योगदान देता है। दिल्ली स्थित एक थिंक-टैंक के अनुसार, 2021-22 में भारत के कृषि और संबद्ध उत्पादों का निर्यात फसल क्षेत्रों और औसत पैदावार के आधार पर 49-50 अरब डॉलर के रिकॉर्ड होने का अनुमान है। इसका आंकलन है कि भारत का कृषि निर्यात अगले तीन से चार वर्षों में आसानी से 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
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क्या कहते हैं आंकड़ें
एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीईडीए) के आंकड़ों का हवाला देते हुए जानकारों का कहना है कि संयुक्त राज्य अमेरिका भारतीय कृषि उत्पादों के लिए सबसे बड़ा निर्यात का देश बना हुआ है। इसके बाद दूसरे नंबर पर चीन का स्थान है। संयुक्त अरब अमीरात को भारत कुल निर्यात का 5 पर्सेंट और सउदी अरब को 4 पर्सेंट निर्यात करता है। फूड सप्लाई चेन को एक या दो सीज़न के लिए तुरंत तय नहीं किया जा सकता है। श्रीलंका में इसका सीधा उदाहरण देखा जा रहा है।