ऐप पर पढ़ें
हर एक महीने की पहली तारीख को किसी ना किसी नियम में बदलाव हो जाता है। 1 जनवरी 2023 से पैक आइटम्स पर मैन्युफैक्चरिंग डेट्स और यूनिट सेल प्राइस आदि का जिक्र करना अनिवार्य हो गया है।उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने कहा है “सभी डिब्बा बंद कमोडिटीज पर मैन्युफैक्चरिंग की तारीख और प्रति इकाई बिक्री मूल्य सोमवार यानी एक जनवरी से लिखना अनिवार्य हो गया है।”
2 दिन में 37 प्रतिशत चढ़ा शेयर, 6 महीने में पैसा हुआ डबल, भाव 20 रुपये से कम
इससे पहले, कंपनियों को डिब्बा बंद उत्पादों पर ‘विनिर्माण की तारीख’ या ‘आयात की तारीख’ अथवा पैकेजिंग की तारीख प्रकाशित करने का विकल्प दिया गया था। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की नवीनतम अधिसूचना के अनुसार, अब कंपनियों के लिए सामान के ‘प्रति इकाई बिक्री मूल्य’ के साथ केवल ‘विनिनिर्माण की तारीख’ प्रकाशित करना अनिवार्य किया गया है।
1 जनवरी को बुलेट ट्रेन की तरह भागने लगा रेलवे का यह स्टॉक, 9 प्रतिशत चढ़ा भाव
उपभोक्ता मामलों के सचिव सिंह से कहा, ”चूंकि पैकेट बंद सामान की बिक्री विभिन्न मात्राओं में की जाती है, ऐसे में महत्वपूर्ण है कि उपभोक्ता डिब्बा बंद सामान की प्रति इकाई बिक्री कीमत से अवगत हों। ताकि वह सभी जानकारी के साथ सोच-विचार कर वस्तु खरीद सके।”
मैन्युफैक्चरिंग की तारीख प्रकाशित होने से उपभोक्ताओं को यह जानने में मदद मिलेगी कि पैक की गई वस्तु कितनी पुरानी है। इससे वे सोच-विचार कर खरीदारी का निर्णय कर सकेंगे। इसी प्रकार, प्रति इकाई बिक्री मूल्य होने से उपभोक्ताओं के लिए वस्तु की लागत का पता लगाना आसान हो जाएगा। उदाहरण के लिए, 2.5 किलोग्राम के पैकेट बंद गेहूं के आटे में अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के साथ प्रति किलो इकाई बिक्री मूल्य भी प्रकाशित होगा।
इसी प्रकार, एक किलो से कम मात्रा वाले डिब्बा बंद उत्पाद के पैकेट पर बिक्री मूल्य प्रति ग्राम होगा। साथ ही उत्पाद की कुल एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) भी होगी।