शेयर बाजार में खुदरा निवेशकों का बढ़ता आकर्षण के बीच स्टार्टअप और नए जमाने की कंपनियों के शेयरों में सूचीबद्धता के बाद तेज गिरावट ने बाजार नियामक सेबी को सतर्क कर दिया है। पिछले साल स्टार्टअप के सूचीबद्ध होने की धूम रही और छोटे निवेशकों ने भी उसमें जमकर पैसा लगाया। लेकिन अब उसमें तेज गिरावट के बाद निवेशकों का निवेश घटकर आधे से भी कम रहा गया है। इसे देखते हुए सेबी ने नए जमाने की कंपनियों की सूचीबद्धता के लिए पुराने मानकों को बदलने का प्रस्ताव जारी किया है।
सेबी के मसौदा प्रस्ताव के मुताबिक अब नई कंपनियों को अपने शेयर भाव के लिए सभी तरह के औचित्य सिद्ध करने होंगे और उन्हें कई मानकों पर परखा जाएगा। बाजार नियामक का कहना है कि पुराने मानक नई कंपनियों को आंकने के लिए पर्याप्त नहीं हैं और इनके वित्तीय विवरण का गंभीर पड़ताल करने की जरूरत है, जिससे छोटे निवेशकों की गाढ़ी कमाई की सुरक्षा की जा सके।
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विशेषज्ञों का कहना है कि नई कंपनियों के शेयरों की कीमतों में तेज गिरावट और खुदरा निवेशकों को होने वाला नुकसान बेहद चिंतनीय है। लेकिन सेबी यदि नई कंपनियों के लिए सूचीबद्धता नियम सख्त करता है तो इससे उनके लिए पूंजी जुटाना आसान नहीं रहेगा और वह आगे नहीं बढ़ पाएंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर कंपनियां सूचीबद्धता के 10 साल बाद मुनाफे में आती हैं। ऐसे में मुनाफा पर ज्यादा जोर देना और उसको लेकर मानक तय करने से नई कंपनियों के लिए परेशानी पैदा होगी।
सेबी को खुदरा निवेशकों की चिंता
नई कंपनियों और खासकर स्टार्टअप के लिए बाजार नियामक सेबी ने सूचीबद्धता के नियमों को बेहद आसान किया था, लेकिन जोमैटो और पेटीएम के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद उनके शेयरों की कीमत में 70 फीसदी तक गिरावट आई है। इससे खुदरा निवेशकों को बहुत नुकसान हुआ है। इसके अलावा कई कंपनियों के शेयर सूचीबद्धता से 50 फीसदी नीचे आ गए हैं। ऐसे में बाजार नियामक सेबी ने नई कंपनियों के लिए सूचीबद्धता के नियमों को सख्त करने और उनके आकलन के लिए कुछ तरीकों पर विचार करने का प्रस्ताव रखा है।
आधी रह गई है निवेशकों की कमाई
पेटीएम का शेयर 2100 रुपये से अधिक पर सूचीबद्ध हुआ था, लेकिन पिछले दिनों उसकी कीमत घटकर 500 रुपये से नीचे पहुंच गई। कई विश्लेषकों ने पेटीएम के शेयरों का मूल्यांकन अधिक होना इसकी वजह बताई है। इसी तरह बाजार में सूचीबद्ध अन्य टेक कंपनियों के शेयरों की कीमत सूचीबद्धा से 50 से 70 फीसदी तक नीचे आई है जिससे निवेशकों निवेश घटकर आधा से भी कम रह गया है।
सेबी इन मानकों पर नई कंपनियों को परेखेगा
बाजार नियामक ने मुख्य प्रदर्शन सूचकांक (केएफआई) को आधार बनाने की सिफारिश की है। इसके अलावा पूर्व में जुटाई गई पूंजी किस मूल्यांकन पर हुई है और उसके बाद कंपनी का कैसा प्रदर्शन रहा है इसको भी परखा जाएगा। इसके अलावा कंपनी को कई अन्य तरह के वित्तीय खुलासे भी करने होंगे। इसके अलावा सभी वित्तीय विवरण और उसके दावों का बाहरी ऑडिटर जांच करके अपनी रिपोर्ट देंगे।
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सेबी ने बैंकरों से कहा है कि आईपीओ के लिए प्रति शेयर कमाई (ईपीएस), प्राइस ऑफ अर्निंग (पीई), रिटर्न ऑन नेटवर्थ और नेट असेट वैल्यू के आधार पर होने वाले मौजूदा मूल्यांकन नए जमाने की कंपनियों कि लिए सही तस्वीर नहीं देते जिससे इन मानकों को बदलने की जरूरत है।