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सस्ते लोन के बीते दिन, आगे भी ब्याज दरें बढ़ाएगा रिजर्व बैंक, आपकी EMI पर भी पड़ेगा असर

आने वाले दिनों में आपकी ईएमआई और बढ़ सकती है। सस्ते लोन के दिन अब लगता है बीत चुके हैं। क्योंकि रिजर्व बैंक की तरफ से बुधवार को रेपो रेट बढ़ाने के बाद आने वाले दिनों में इसकी और किस्तें भी देखी जा सकती हैं। भारतीय स्टेट बैंक की रिसर्च रिपोर्ट इकोरैप के मुताबिक आने वाले दिनों में भी मौद्रिक नीति समीक्षा की जून और अगस्त की बैठक में ब्याज दरों में इजाफा किए जाने की आशंका है। रिपोर्ट में इस बात की भी संभावना जताई गई है कि इस वित्तवर्ष यानि 2023 के मार्च महीने के आखिर तक रेपो रेट 5.15 फीसदी के स्तर तक पहुंच सकता है।

कोरोना महामारी को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 1.15 फीसदी की कटौती की थी। पहली 0.75 फीसदी की कटौती मार्च 2020 में हुई थी। उसके बाद मई 2020 में फिर से 0.40 फीसदी की कटौती की गई। तब से दरों में कोई बदलाव नहीं देखने को मिला है। अब देश में बढ़ती महंगाई को देखते हुए रिजर्व बैंक ने उसे काबू में करने के लिए एक बार फिर से दरें बढ़ानी शुरू कर दी है।

महंगाई की बड़ी मार: साबुन-शैम्पू समेत कई उत्पाद 15 फीसदी तक महंगे हुए, खर्च में कटौती करने को रहें तैयार

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को रेपोरेट में 0.40 फीसदी की बढ़ोत्तरी का ऐलान किया था। रिपोर्ट में बढ़ती महंगाई की वजहों को गिनाते हुए कहा गया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध को देखते हुए तमाम खाने पीने की जरूरी चीजों के दाम बढ़ गए हैं। इससे रिजर्व बैंक भी दबाव में है।

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दुनियाभर में बढ़ रही हैं ब्याज दरें

रिपोर्ट के मुताबिक रिजर्व बैंक के अलावा दुनिया के 21 देशों ने इस साल अप्रैल और मई महीने मे दरें बढ़ाई है। साथ ही इन 21 देशों में से 14 देशों ने दरों में आधा फीसदी या उससे ज्यादा का इजाफा किया है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने भी दो दशक में सबसे बड़ी बढ़त करते हुए ब्याज दरों में आधा फीसदी का इजाफा कर दिया है।

पेट्रोल और डीजल पर लग रहे टैक्सों में कटौती पर विचार की जरूरत

इकोरैप रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि आपूर्ति-पक्ष से जुड़ी लागत के दबाव को कम करने के उपायों पर इस समय खास फोकस करने की जरूरत है। खास तौर पर पेट्रोल और डीजल पर लग रहे टैक्सों में कटौती पर भी नए सिरे से विचार की जरूरत है। इससे भी महंगाई को काबू में करने में मदद मिल सकती है और रिजर्व बैंक की तरफ से उठाए गए कदमों का पूरी तरह से असर भी होना शुरू हो जाएगा हालांकि नीतिगत स्तर पर ब्याज दरों में इजाफा किए जाने के बाद भी कुछ समय के लिए महंगाई के ऊंचे स्तर पर रहने की आशंका बनी हुई है।

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