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विदेशी निवेशक जब तक रहेंगे बिकवाल, तब तक ऐसा ही रहेगा शेयर बाजार का हाल

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का भारतीय शेयर बाजारों में बिकवाली का सिलसिला जून में भी जारी है।  कोटक सिक्योरिटीज लिमिटेड के इक्विटी शोध प्रमुख (खुदरा) श्रीकांत चौहान ने कहा, जब तक विदेशी निवेशक बिकवाल रहेंगे, तब तक बाजारों के लिए बढ़त में आना मुश्किल है।   कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, ऊंची मुद्रास्फीति तथा सख्त मौद्रिक रुख के मद्देनजर अभी एफपीआई की बिकवाली जारी रह सकती है।

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मई में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजारों से करीब 39,000 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है। अमेरिका में बांड पर प्रतिफल बढ़ने, डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और आक्रामक वृद्धि की संभावना के बीच एफपीआई भारतीय बाजार में बिकवाल बने हुए हैं। एफपीआई 2022 में अबतक भारतीय शेयर बाजारों से 1.68 लाख करोड़ रुपये अधिक की निकासी कर चुके हैं।

दो दिन में निवेशकों के 9.75 लाख करोड़ डूबे

शेयर बाजारों में जोरदार गिरावट के बीच दो कारोबारी सत्रों में निवेशकों की पूंजी 9.75 लाख करोड़ रुपये घट गई है। शेयर बाजारों में गिरावट के रुख के अनुरूप बीएसई की सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 9,75,889.77 करोड़ रुपये घटकर 2,45,19,673.44 करोड़ रुपये पर आ गया है।

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 अमेरिका में महंगाई के चालीस साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने से ब्याज दरों में तेजी वृद्धि की संभावना और चीन में कोरोना के मामलों में आई तेजी से घबराए निवेशकों की चौतरफा बिकवाली के दबाव में सोमवार को घरेलू शेयर बाजार लगातार दूसरे दिन गिरता हुआ ढाई प्रतिशत से अधिक टूटकर ढेर हो गया।

बीएसई का सेंसेक्स 1456.74 अंक का गोता लगाकर 53 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 52846.70 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह एनएसई का निफ्टी 427.40 अंक लुढ़ककर 15774.40 अंक पर आ गया। दिग्गज कंपनियों की तरह बीएसई की छोटी और मझौली कंपनियों ने भी बिकवाली की मार झेली। मिडकैप 2.73 प्रतिशत उतरकर 21,876अंक और स्मॉलकैप तीन अंक गिरकर 25,043 अंक पर रहा। विदेशी निवेशकों ने 3,973.95 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे।

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 ब्याज दरें और बढ़ने की आशंका से घबराहट

आईआईएफल के उपाध्यक्ष अनुज गुप्ता ने कहा कि फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले कमजोर वैश्विक रुख का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा। अमेरिका में मुद्रास्फीति के बढ़ने से वहां नीतिगत दर में तेज वृद्धि की संभावना है। इससे दुनिया भर के शेयर बाजारों पर इसका असर पड़ा।

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