विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने वित्त वर्ष 2021-22 में रिकॉर्ड 1.4 लाख करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे। जबकि इससे पहले 2020-21 में उन्होंने 2.7 लाख करोड़ रुपये मूल्य के शेयर खरीदे थे। बीते वित्त वर्ष के 12 महीनों में से नौ महीनों में निकासी की। विदेशी निवेशक अक्टूबर, 2021 से लगातार घरेलू बाजार में शेयर बेच रहे हैं।
कितनी निकासी की गई: डिपॉजिटरी आंकड़ों के अनुसार, किसी एक वित्त वर्ष में घरेलू शेयर बाजार से इतनी राशि की निकासी सर्वाधिक है। इससे पहले, 2018-19 में 88 करोड़ रुपये, 2015-16 में 14,171 करोड़ रुपये और 2008-09 में 47,706 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर एफपीआई ने बेचे थे।
वजह क्या है: पूंजी निकासी का मुख्य कारण कोरोना वायरस मामलों में तीव्र वृद्धि, आर्थिक वृद्धि को लेकर जोखिम और रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मुद्रास्फीति में वृद्धि को देखते हुए निकट भविष्य में एफपीआई की तरफ से निवेश प्रवाह में घट-बढ़ बना रह सकता है।
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बता दें कि विदेशी निवेशकों ने बांड बाजार में शुद्ध रूप से 2021-22 में 1,628 करोड़ रुपये का निवेश किया। जबकि एक साल पहले 2020-21 में 50,443 करोड़ रुपये की निकासी की थी।