रूस और यूक्रेन (Russia-Ukraine Conflict) के बीच चल रहे युद्ध की वजह से जहां दुनिया भर में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। वहीं, भारत के लिए यह एक मौका बनकर आया है। भारत इस संकट की घड़ी में दुनिया के बाजार में एक प्रमुख गेंहू सप्लाई करने वाले देश के तौर पर उभर सकता है। केन्द्र की मौजूदा नरेन्द्र मोदी सरकार इसके लिए बकायदा प्लान बनाने में जुट भी गई है। आइए समझते हैं कि क्या है सरकार की योजना?
सरकार इन तैयारियों में जुटी
केन्द्र सरकार इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहती है। यही वजह है कि सरकार की तरफ से गेंहू की सबसे उत्तम क्वालिटी जांचने के लैब्स, सप्लाई बेहतर करने के रेलवे का ज्यादा और बेहतर उपयोग पर जोर के अलावा पोर्ट्स को गेंहू के एक्सपोर्ट पर ज्यादा ध्यान देने जैसे जरूरी निर्देश सरकार की तरफ से दिए जा रहे हैं। भारत, चीन के बाद सबसे बड़ा गेंहू का उत्पादन करने वाला देश है। ऐसे में दुनिया भर में बढ़ते दाम की वजह से भारत के लिए यह एक मौका बना है।
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गेंहू की सप्लाई और रूस-यूक्रेन युद्ध का क्या है कनेक्शन?
मौजूदा समय में रूस विश्व का सबसे बड़ा गेंहू एक्सपोर्ट करने वाला देश है। वहीं, यूक्रेन भी गेंहू सप्लाई करने वाले देशों की लिस्ट में शामिल है। दोनों देशों के बीच चल रहे युध्द की वजह से भारत सहित अन्य गेंहू उत्पादक देशों के लिए यह एक बड़ा मौका बनकर आया है।
क्या है भारत का प्लान?
भारत ने पिछले साल 6.12 मिलियन टन गेंहू को एक्सपोर्ट किया था। जबकि उससे पहले के साथ में महज 1.16 मिलियन टन ही एक्सपोर्ट किया जा सका था। समाचार एजेंसी राॅयटर्स के अनुसार सरकार ने इस साल 10 मिलियन टन गेंहू को एक्सपोर्ट करने लक्ष्य रखा है। सरकार किसान और ट्रेडर्स को हर तरीके से मदद करना चाह रही रही है। जिससे दुनिया भर के बाजार में भारत के गेंहू की डिमांड बढ़ाई जा सके।