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यह दिग्गज कंपनी कर्ज उतारने के लिए अपने भारतीय कारोबार को बेचेगी! अब पूरा फोकस UK के बिजनेस पर

इंटरनेशनल मेडिसिन कंपनी वॉकहार्ट (Wockhardt) अपने भारतीय कारोबार को बेच सकती है। कंपनी भारतीय कारोबार को बेचकर कर्ज घटाने की योजना बना रही है और पूरी तरह यूके के बिजनेस पर फोकस करना चाहती है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि इंटरनेशनल  मेडिसिन कंपनी वॉकहार्ट अपने यूके बिजनेस  पर फोकस  कर सकती है और कम मार्जिन वाले भारत के कारोबार को बेच सकती है।

क्या है योजना?
मुंबई के दो एनालिस्ट ने बताया कि वॉकहार्ट के पास अपने 670 करोड़ रुपये के घरेलू कारोबार को बेचने के अलावा कुछ अन्य  विकल्प  भी  हैं। सूत्रों ने बताया कि यह भारत में स्थित एकमात्र कारोबार वर्टिकल है जिसे वह बेच सकता है और लगभग 3-4 गुना रेवेन्यू आसानी से प्राप्त कर सकता है। कई प्लेयर्स ब्रांड अधिग्रहण की तलाश में हैं। वहीं, एक अन्य सोर्स ने बताया कि वॉकहार्ट अपने अपने यूके और यूरोपीय संघ के कारोबार पर फोकस करना चाहता है। हालांकि, इस पर कंपनी के अधिकारियों की तरफ से फिलहाल कोई बयान नहीं आया है।

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कई नए ब्रांड्स को बेचने की प्लानिंग
एक अन्य सोर्स ने कहा कि कंपनी ने 2020 में कुछ प्रोफिटेबल  ब्रांड डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज (डीआरएल) को बेचे गए  हैं। वहीं, प्रैक्टिन, ज़ेडेक्स, ब्रो-ज़ेडेक्स, ट्रिप्टोमर और बायोवैक जैसे फेमस ब्रांडों को डीआरएल को बेच दिया गया है। ये चार-पांच ब्रांड डीआरएल को बेचे गए कारोबार का लगभग 40 प्रतिशत थे। इसने कुल 62 ब्रांड बेचे हैं। जानकारों के मुताबिक, कंपनी के पास बचे ब्रांड नए हैं, जिसका मार्जिन कम है। इन ब्रांडों पर  खर्च करने के बजाय उन्हें बेचना ही बेहतर होगा। वॉकहार्ट ने हिमाचल प्रदेश के बद्दी में अपना प्लांट डीआरएल को बेच दिया। 

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जानकारों के मुताबिक, डायबिटीज रोधी ब्रांड वॉकहार्ट की भारत की बिक्री में 27 प्रतिशत, विटामिन और खनिजों का लगभग 26 प्रतिशत और गैस्ट्रो-आंतों की दवाओं का योगदान 20 प्रतिशत है। तीन ब्रांड- मिथाइलकोबल (विटामिन), स्पैस्मो प्रोक्सीवॉन प्लस (दर्द और दर्द निवारक) और वोसुलिन (इंसुलिन)- मिलकर वॉकहार्ट के भारत के राजस्व में 50 प्रतिशत से अधिक का योगदान करते हैं।

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