जर्मनी की रिटेल विक्रेता मेट्रो एजी (Metro AG) भारत से कारोबार समेट रही है। मेट्रो एजी अपनी भारतीय सहायक कंपनी मेट्रो कैश एंड कैरी इंडिया में हिस्सेदारी बेच रही है। इसे खरीदने के लिए मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस रिटेल, प्रेमजीइन्वेस्ट (अजीम प्रेमजी के पारिवारिक कार्यालय द्वारा प्रबंधित निवेश फंड) , थाईलैंड का सबसे बड़ा ग्रुप चारोन पोकफंड (CP) ग्रुप और फूड एंड ग्रॉसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी में जबरदस्त रेस है। मेट्रो कारोबार को खरीदने के लिए इन सभी कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई हैं। यह बात इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कही गई है।
टाटा भी कर रहा मूल्यांकन
इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने यह भी बताया कि टाटा ग्रुप और प्राइवेट इक्विटी फंड बैन कैपिटल 1-1.5 बिलियन डाॅलर के बायआउट अवसर का मूल्यांकन कर रहे हैं, लेकिन अभी कोई योजना नहीं बना रहे हैं। बता दें कि इसी सप्ताह नाॅन बिल्डिंग ऑफर को जमा करना है। बता दें कि इस दौड़ से Flipkart-Walmart, DMart और Amazon ने अपने आप को बाहर कर लिया है।
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रिलायंस ने इसे अफवाह बताया
रिलायंस रिटेल के प्रवक्ता ने कहा “हम अपनी पॉलिसी के तहत, हम मीडिया की अटकलों और अफवाहों पर टिप्पणी नहीं करते हैं। हमारी कंपनी निरंतर आधार पर विभिन्न अवसरों का मूल्यांकन करती है।” हालांकि, PremjiInvest, CP Group, Swiggy, Tata और Bain Capital ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया।
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कारोबार को बढ़ाने के लिए निवेशक की तलाश
सूत्र के मुताबिक भारतीय व्यापार को अपना नेटवर्क बढ़ाने और अधिक स्टोर जोड़ने के लिए और अधिक निवेश की आवश्यकता है। वहीं, मेट्रो एजी के प्रवक्ता ने भी स्वीकार किया है कि कंपनी रणनीतिक विकल्पों की समीक्षा कर रही है। मेट्रो एजी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (कॉरपोरेट संचार) गेर्ड कोस्लोव्स्की ने कहा, ‘‘मेट्रो इंडिया एक बढ़ता हुआ व्यवसाय है, जिसमें थोक के लिए भारी संभावनाएं हैं। हम मेट्रो की मौजूदा थोक क्षमताओं को बढ़ाने और भारत में व्यापार वृद्धि में तेजी लाने के लिए संभावित भागीदारों के साथ विकल्पों की समीक्षा कर रहे हैं।’’