मोदी सरकार पूंजीगत लाभ कर प्रणाली (capital gains tax system) में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। कल्याणकारी योजनाओं में ज्यादा खर्च के लिए राजस्व संग्रह बढ़ाने के मकसद से यह बदलाव किया जा रहा है। इस मामले से वाकिफ दो सरकारी अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।
आश्चर्यजनक रिटर्न! इस पेनी स्टाॅक ने 5 महीने में ही 1 लाख रुपये के निवेश को बना दिया 13 करोड़ रुपये
एक अधिकारी के मुताबिक, इस संबंध में एक प्रस्ताव पर वित्त मंत्रालय में अध्ययन हो रहा है। इसके पीछे सरकार का तर्क है कि पूंजी बाजार से अर्जित निष्क्रिय आय पर व्यवसाय से होने वाली आय के मुकाबले कम कर नहीं लगाना चाहिए।
पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी, यह बुधवार भी राहत भरा रहा, देश में सबसे सस्ता तेल इस शहर में
इसमें उद्यमशीलता का जोखिम शामिल है और रोजगार सृजन पर असर पड़ता है। इसमें सरकार का कल्याणवाद का विचार भी निहित है जिसके लिए राजस्व को बढ़ाने की आवश्यकता है। एक अधिकारी का कहना है कि पूंजीगत लाभ कर प्रणाली को ज्यादा किफायती बनाने के लिए विधायी बदलावों की आवश्यकता है। इसमें अगले बजट तक का समय लग सकता है।
दो प्रकार का होता है capital gains tax
अभी देश में दो प्रकार का पूंजीगत लाभ कर प्रचलन में हैं। इसमें दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) और अल्पकालिक पूंजीगत लाभ शामिल हैं। मौजूदा प्रणाली में एक वर्ष से ज्यादा अवधि के इक्विटी निवेश को एलटीसीजी और एक वर्ष से कम अवधि के इक्विटी निवेश को एसटीसीजी कहा जाता है। संपत्ति के मामले में एलटीसीजी की अवधि 36 महीने है।
अन्य देशों की कर प्रणाली का किया अध्ययन
अधिकारी का कहना है कि हम अन्य देशों की पूंजीगत लाभ कर प्रणाली का भी अध्ययन किया है और हम इससे अलग नहीं हो सकते हैं। सरकार का अनुमान है कि कई देशों में दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर 25 से 30 प्रतिशत तक या लागू इनकम टैक्स की दर के बराबर है।