भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक और सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया है। बता दें कि इस साल का यह चौथा बैंक है जिस पर आरबीआई ने कार्रवाई की है। बैंकिंग नियामक ने उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित पीपुल्स को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (PEOPLE’S CO-OPERATIVE BANK LTD) का लाइसेंस रद्द कर दिया। बैंक की खराब वित्तीय स्थिति और कमाई की संभावनाएं नहीं होने की वजह से केन्द्रीय बैंक ने यह कदम उठाया है। आरबीआई ने 21 मार्च 2022 से इस बैंक के कारोबार को बंद कर दिया है।
ग्राहकों के हित में लिया गया फैसला
आरबीआई के मुताबिक, बैंक वित्तीय स्थिति ठीक नहीं होने के बाद भी अगर इसे अपना कारोबार जारी रखने की अनुमति दी जाती है तो ये जनहित में नहीं होगा। आरबीआई ने कहा, “सहकारिता आयुक्त और सहकारी समितियों, उत्तर प्रदेश के रजिस्ट्रार से भी बैंक को बंद करने और ऋणदाता के लिए एक परिसमापक नियुक्त करने का आदेश जारी करने का अनुरोध किया गया है।”
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जानें पूरा मामला
जांच में पाया गया था कि शहरी कोआपरेटिव सेक्टर में पंजीकृत होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्र में लोन बांटे गए। किसी तरह की गारंटी नहीं ली गई। 80 फीसदी से ज्यादा लोन आटो सेक्शन में दे दिया गया। केवाईसी पूरी नहीं की गई। हजारों बोगस लोगों को लोन बांट दिए गए। यही वजह रही कि वाहन कबाड़ हो गए और बिना किस्त के एनपीए हो गए। अब उन वाहनों की बिक्री से दस लाख भी नहीं मिलेंगे।
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ग्राहकों के पैसे का क्या होगा?
बता दें कि लिक्विडेशन पर 99% खाताधारकों को डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कोर्पोरेशन (DICGC) एक्ट, 1961 के नियम के तहत उनकी जमा पूंजी मिल जाएगी। इस नियम के तहत डिपोजिटर्स को 5 लाख रुपये तक की राशि दी जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021 के बजट में DICGC एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव रखा था। इसका उद्देश्य था कि अगर कोई बैंक अस्थायी रूप से अपने दायित्वों का निर्वाह करने में असफल हो जाता है तो जमाकर्ताओं को आसानी से और समय से उनकी 5 लाख रुपए तक की जमा राशि मिल सके।