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महंगाई के खिलाफ RBI का एक्शन? कितना मुश्किल है कंट्रोल कर पाना समझिए

करीब 4 साल बाद केंद्रीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। ये बढ़ोतरी 0.40 फीसदी की हुई है। इसी के साथ रेपो रेट 4.40 फीसदी के स्तर पर आ गया है। वैसे तो आरबीआई का यह फैसला महंगाई को कंट्रोल करने के लिए है लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए यह सबकुछ इतना आसान नहीं है।

कैसे हैं हालात: रूस- यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग के बाद बदलते माहौल को देखें तो खाद्य महंगाई आगे भी बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा  इंडोनेशिया की ओर से पाम तेल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत में खाद्य तेल की कीमतें बढ़ जाएंगी। ये इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि भारत बड़े पैमाने पर इंडोनेशिया से पाम तेल मंगाता रहा है। 

वैश्विक स्तर पर गेहूं की कमी से घरेलू कीमतें प्रभावित हो रही हैं। हालांकि, घरेलू आपूर्ति पर किसी तरह का संकट नहीं है। इसके बावजूद वैश्विक माहौल का असर दिख रहा है। खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय के मुताबिक गेहूं के अधिक निर्यात और उत्पादन में संभावित गिरावट के बीच चालू रबी विपणन वर्ष में केंद्र की गेहूं खरीद आधी यानी 1.95 करोड़ टन रहने की संभावना है। इसके अलावा उर्वरक की कीमतों में उछाल के अलावा अन्य लागत का खाद्य कीमतों पर सीधा प्रभाव पड़ा है।

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट:  डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रूमकी मजूमदार ने कहा, ‘‘रेपो रेट में वृद्धि की जून में संभावना थी। आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाने को लेकर एक महीने पहले ही अचानक से उठाया गया कदम बताता है कि वह देखो और इंतजार करो पर काम नहीं करना चाहता। बल्कि मुद्रास्फीति के आर्थिक पुनरुद्धार को पटरी से उतारने से पहले उसे काबू में लाने को तेजी से कदम उठाने को इच्छुक है।’’

उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रदीप मुलतानी ने कहा कि आरबीआई के कदम का मकसद मुद्रास्फीति दबाव को काबू में लाना है। लेकिन रेपो दर और सीआरआर (नकद आरक्षित अनुपात) में वृद्धि उपभोक्ता और कारोबारी धारणा को प्रभावित करेगी। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था अभी भी महामारी के प्रभाव से उबर रही है। ऊपर से वैश्विक स्तर पर संकट भी है। ऐसे में रेपो रेट में वृद्धि का व्यापार और वित्त पर व्यापक असर पड़ेगा।

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रियल एस्टेट पर असर: रिजर्व बैंक द्वारा प्रमुख नीतिगत दरों में बढ़ोतरी के फैसले से रियल एस्टेट की वृद्धि पर असर पड़ेगा और घरों की मांग प्रभावित हो सकती है। उद्योग से जुड़े लोगों ने यह आशंका व्यक्त की है।

अभी और बढ़ोतरी: ब्रिटिश ब्रोकरेज बार्कलेज के भारत में मुख्य अर्थशास्त्री राहुल बाजोरिया ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जून की शुरुआत में होने वाली अगली बैठक में आरबीआई रेपो दर में कम से कम 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी करेगा और जब यह 5.15 प्रतिशत को छू जाएगी उसके बाद ही केंद्रीय बैंक कुछ राहत देने के बारे में विचार करेगा।

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