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बुनियादी उद्योगों की वृद्धि छह माह के निचले स्तर पर, जुलाई में धीमी पड़कर 4.5 फीसद पर आई वृद्धि दर

आठ बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर जुलाई में धीमी पड़कर 4.5 फीसद रही। उत्पादन वृद्धि की यह दर छह महीने में सबसे कम है। बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एक साल पहले इसी महीने में यह 9.9 फीसद थी।

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आंकड़ों के अनुसार आठ बुनियादी उद्योगों कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष के पहले चार माह अप्रैल-जुलाई में 11.5 फीसद रही। एक साल पहले 2021-22 की इसी अवधि में यह 21.4 फीसद थी। आलोच्य महीने में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में क्रमश: 3.8 फीसद और 0.3 फीसद की गिरावट आई।

इसमें तेजी आने पर रोजगार के अवसर बढ़ते हैं

उल्लेखनीय है कि आठ बुनियादी उद्योगों का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में 40 फीसदी भारांश है। विशेषज्ञों का कहना है कि बुनियादी उद्योगों में सुस्ती का असर औद्योगिक सूचकांक पर भी होगा। उनका कहना है कि बुनियादी उद्योग निर्माण ढांचागत क्षेत्र की वृद्धि में अहम भूमिका निभाते हैं और इसमें तेजी आने पर रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर जून में 13.2 फीसद, मई में 19.3 फीसद, अप्रैल में 9.5 फीसद, मार्च में 4.8 फीसद, फरवरी में 5.9 फीसद और जनवरी में चार फीसद थी।

कब कितनी रही रफ्तार
अवधि वृद्धि (फीसदी में)

  • जून 13.2
  • मई 19.3
  • अप्रैल 9.5
  • मार्च 4.8
  • फरवरी 5.9
  • जनवरी 04
  • चीन के विनिर्माण क्षेत्र में आई नरमी

    निर्यात और उपभोक्ता मांग के कमजोर रहने के कारण अगस्त में चीन की विनिर्माण गतिविधियों में कमी आई। बुधवार को एक सर्वे में यह जानकारी दी गई। राष्ट्रीय सांख्यिकी एजेंसी और एक उद्योग समूह द्वारा जारी मासिक सूचकांक 100 अंकों के पैमाने पर जुलाई के 49 से बढ़कर अगस्त में 49.4 हो गया। 50 से नीचे के अंक गतिविधियों में कमी को दर्शाते हैं।

    अर्थव्यवस्था आने वाले महीनों में भी गति पाने के लिए संघर्ष करेगी

    कैपिटल इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट में कहा गया कि सर्वे से पता चलता है कि इस महीने आर्थिक गति कम हुई है और अर्थव्यवस्था आने वाले महीनों में भी गति पाने के लिए संघर्ष करेगी। चीन में कोरोनो वायरस से बचाव के लिए कारखानों, दुकानों और क्षेत्रों के बार-बार बंद होने और उद्योग के ऋण के उपयोग पर नियंत्रण की वजह से रियल एस्टेट गतिविधियां कम हुई हैं तथा उपभोक्ता मांग में भी गिरावट आई है।

    राजकोषीय घाटा वार्षिक लक्ष्य के 20.5 फीसद पर

    केंद्र का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों यानी जुलाई के अंत तक वार्षिक लक्ष्य के 20.5 फीसद पर पहुंच गया है। एक साल पहले की समान अवधि में यह 21.3 फीसद था। बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह आंकड़ा सार्वजनिक वित्त की स्थिति में सुधार को दर्शाता है। व्यय और राजस्व के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जुलाई की अवधि में यह 3,40,831 करोड़ रुपये रहा है।

    राजकोषीय घाटा सरकार द्वारा बाजार से लिए गए कर्ज को भी दर्शाता है। लेखा महानियंत्रक (सीजीए) की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, टैक्स समेत सरकार की प्राप्तियां पहले चार माह में 2022-23 के लिए बजट अनुमान के 7.85 लाख करोड़ रुपये या 34.4 फीसद पर पहुंच गई हैं। एक साल पहले की समान अवधि के दौरान यह लगभग इतनी ही यानी 34.6 फीसद पर थीं। वहीं, कर राजस्व 6.66 लाख करोड़ रुपये या चालू वित्त वर्ष के बजट अनुमान का 34.4 फीसद रहा। पिछले साल भी सरकार अप्रैल-जुलाई के दौरान अपने वार्षिक अनुमान का 34.2 फीसद पाने में सफल रही थी।

    आकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार का कुल खर्च 11.26 लाख करोड़ रुपये या बजट अनुमान का 28.6 फीसद रहा है। यह लगभग एक साल पहले की समान अवधि के बराबर है। इसके अलावा पूंजीगत व्यय पूरे वर्ष के बजट लक्ष्य का 27.8 फीसद रहा है, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 23.2 फीसद था। वित्त वर्ष 2022-23 के लिए सरकार का राजकोषीय घाटे का अनुमान 16.61 लाख रुपये या सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 6.4 फीसद है।

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