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बढ़ने वाला है लोन की EMI का बोझ! SBI इकोरैप की रिपोर्ट ने दी टेंशन

आने वाले दिनों में आपके लोन की ईएमआई का बोझ बढ़ सकता है। एसबीआई की इकोरैप रिपोर्ट से ये संकेत मिल रहे हैं। 

दरअसल, भारतीय स्टेट बैंक की इकोनॉमी रिसर्च टीम ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जून में रेपो रेट में कम से कम 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करेगा। ये सिलसिला अगस्त की बैठक में भी जारी रहने की आशंका है। मतलब ये कि रेपो रेट में लगातार दो बार बढ़ोतरी हो सकती है। आपको बता दें कि रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 4 फीसदी पर स्थिर रखा है। यह लगातार 10वीं बार है जब आरबीआई ने रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है।

नुकसान क्या है: अगर ऐसा होता है तो लोन की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। रेपो रेट के आधार पर ही बैंक लोन की ब्याज दरें भी तय करते हैं। यही वजह है कि रेपो रेट के बढ़ने या घटने की वजह से आम लोगों के होम या कार लोन की ईएमआई भी प्रभावित होती है।

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महंगाई कंट्रोल पर जोर: एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक आरबीआई महंगाई कंट्रोल पर जोर देने के पक्ष में है। खुदरा और थोक महंगाई में बढ़ोतरी हुई है। उपभोक्ता मूल्य-आधारित सूचकांक (सीपीआई) द्वारा मापी गई खुदरा मुद्रास्फीति, मार्च 2022 में वार्षिक आधार पर 6.95 फीसदी हो गई, जबकि फरवरी 2022 में यह 6.07 फीसदी थी।

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कोरोना संकट के बाद अब यूक्रेन और रूस के जंग की वजह से कई चीजें प्रभावित हुई हैं। यही वजह है कि महंगाई भी बढ़ी है। पिछली मौद्रिक नीति की बैठक में आरबीआई ने इसको लेकर मंथन भी की थी। आरबीआई के मुताबिक खुदरा मुद्रास्फीति के चालू वित्त वर्ष में 5.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

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