HomeShare Marketपेट्रोल-डीजल सस्ता करने के लिए क्या टैक्स कम कर सकती है सरकार?

पेट्रोल-डीजल सस्ता करने के लिए क्या टैक्स कम कर सकती है सरकार?

21 मार्च के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इन कीमतों को कम करने का एक तरीका सरकारों के लिए टैक्स में कटौती करना है। सवाल यह है कि क्या वे ऐसा करने की स्थिति में हैं? आइए, इसे समझने की कोशिश करते हैं।

 

चार्ट-3 पर एक नजर डालिए। यह केंद्र सरकार द्वारा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में पेट्रोलियम से होने वाली कमाई के प्रतिशत को दर्शाता है। चार्ट-3 बहुत ही रोचक स्थिति बयान करता है। 2014-15 में केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोलियम उत्पादों पर कर लगाकर अर्जित कुल उत्पाद शुल्क सकल घरेलू उत्पाद का 0.79 प्रतिशत था। राज्य सरकारों के लिए बिक्री कर/मूल्य वर्धित कर सकल घरेलू उत्पाद का 1.1 प्रतिशत था। उसके बाद से केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किया गया कर बढ़ गया है और यह 2020-21 में सकल घरेलू उत्पाद का 1.88 प्रतिशत था। 2021-22 के पहले छह महीनों में यह 1.58 प्रतिशत था।

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जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, अगस्त 2014 के बाद तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गईं। एक अक्टूबर 2014 तक पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क क्रमश: 9.48 रुपये प्रति लीटर और 3.56 रुपये प्रति लीटर था। इसके बाद जैसे ही कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आई, केंद्र सरकार ने उत्पादक शुल्क बढ़ा दिया। 2014 के अंत से केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल से धन उगाहने में कामयाब रही है। कच्चे तेल की कीमत में गिरावट का लाभ पेट्रोल और डीजल की कम कीमतों के रूप में लोगों को नहीं दिया गया है।

पेट्रोल-डीजल कीमतें कैसे कम होंगी? मोदी सरकार के पास क्या हैं उपाय?

जब बिक्री कर/मूल्य वर्धित कर की बात आती है, तो राज्य सरकारों की आय पिछले कुछ वर्षों में सकल घरेलू उत्पाद के 1-1.1 प्रतिशत पर कमोबेश स्थिर रही है। इसलिए कुल मिलाकर, राज्य सरकारें पेट्रोल और डीजल पर बिक्री कर/मूल्य वर्धित कर में कटौती करने की स्थिति में नहीं हैं। एक अन्य कारक जिसे ध्यान में रखने की जरूरत है, वह यह है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकारों के लिए दो प्रमुख राजस्व देने वाले कारक – शराब और अचल संपत्ति कर – महामारी के चलते प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा, अधिकांश परोक्ष करों केजीएसटी के तहत आने से राज्य सरकारों की राजस्व अर्जित करने की क्षमता कम हो गई है।

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