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पेट्रोल-डीजल पर टैक्स का गणित: आपकी जेब पर भारी पड़ता और सरकार की जेब को भारी करता तेल

यूक्रेन पर रूस के हमले ने तेल की कीमतों को बहुत बढ़ा दिया है। तेल कंपनियां और सरकार से लेकर भारतीय रिजर्व बैंक तक, सभी बढ़ती कीमतों को लेकर अभी खास चिंतित नहीं हैं। आखिर क्या है कच्चे तेल और तेल से कमाई का गणित? आज तेल से कौन कितनी कमाई कर रहा है? क्या सरकार चाहे, तो राहत दे सकती है? ऐसे ही सवालों पर केंद्रित है यह रिपोर्ट

अप्रैल 2021 से फरवरी 2022 के दौरान भारत ने 85.4 प्रतिशत तेल का आयात किया। वित्त वर्ष 2019-20 और 2020-21 में, आयात निर्भरता क्रमश: 85 प्रतिशत और 84.4 प्रतिशत थी। इस निर्भरता की वजह से ही तेल की कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किलें खड़ी कर देती हैं। बहरहाल, मई 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के चुने जाने के बाद से, भारत कच्चे तेल की कीमत के मोर्चे पर भाग्यशाली रहा है। चार्ट-1 पर नजर डालें, जो अप्रैल 2011 में कच्चे तेल की भारतीय बास्केट की औसत मासिक कीमत को दर्शाता है।

अप्रैल 2011 से अगस्त 2014 तक, कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक थी (जून 2012 को छोड़कर जब यह औसतन 94.5 डॉलर प्रति बैरल थी)। अगस्त 2014 के बाद कीमतों में गिरावट शुरू हुई और तब से मोटे तौर पर 70 डॉलर प्रति बैरल से कम रही है।

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मार्च 2022 में कच्चे तेल के भारतीय बास्केट की औसत कीमत 112.9 डॉलर प्रति बैरल थी। अगस्त 2014 के बाद यह पहली बार था, जब तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई। 2021-22 की दूसरी छमाही में तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई। तेल बाजार ने रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करने की बढ़ती आशंका को ध्यान में रखना शुरू कर दिया था।

भारत रूस से ज्यादा कच्चे तेल का आयात नहीं करता

रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है। ऑर्गनाइजेशन इकोनॉमिक कॉम्प्लेक्सिटी का डाटा बताता है कि 2020 में रूस ने 74.4 अरब डॉलर का तेल निर्यात किया। वह केवल सऊदी अरब से पीछे था, जिसने 95.7 अरब डॉलर का तेल निर्यात किया था। रूसी तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से, वैश्विक तेल की कीमतें, आश्चर्य की बात नहीं, बढ़ गई हैं। दिलचस्प बात यह है कि भारत रूस से ज्यादा कच्चे तेल का आयात नहीं करता है। साल 2019-20 और साल 2020-21 में भारत द्वारा आयात किए गए कुल तेल का रूसी आयात क्रमश: 1.6 प्रतिशत और 1.5 प्रतिशत था।

पेट्रोल-डीजल सस्ता करने के लिए क्या टैक्स कम कर सकती है सरकार?

जबकि पिछले साल सितंबर से तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से अधिक रही हैं, खुले बाजार में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमत 2 नवंबर 2021 से 21 मार्च 2022 तक नहीं बढ़ी थी। यह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और अन्य चार राज्यों में विधानसभा चुनावों के कारण था। 21 मार्च को दिल्ली और मुंबई में पेट्रोल की कीमत क्रमश: 95.41 रुपये प्रति लीटर और 109.98 रुपये प्रति लीटर थी। देश के अन्य हिस्सों में भी कीमतों में समान वृद्धि देखी गई है। इस परिदृश्य में प्रश्न यह है कि भारत की स्थिति कैसी है? पेट्रोल व डीजल की ऊंची कीमतों से निपटने के लिए क्या किया जा सकता है? यदि नहीं, तो कीमतें कम से कम मौजूदा स्तरों पर तो स्थिर रहें।

पेट्रोल और डीजल की कीमत

जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, पेट्रोल और डीजल, दोनों की खुदरा कीमत 21 मार्च से बढ़ी है। चार्ट-2 पर एक नजर डालिए। यह 1 अप्रैल को दिल्ली में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के पंपों पर 101.81 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल की कीमत को विभिन्न मदों में बांटकर बताता है।

केंद्र और राज्य सरकार के टैक्स का गणित

आइए समझने की कोशिश करते हैं कि 101.81 रुपये प्रति लीटर की कीमत कैसे पड़ रही है। कंपनी ने पेट्रोल पंप चलाने वाले डीलरों को 53.54 रुपये प्रति लीटर पर पेट्रोल बेचा। इस पर केंद्र सरकार ने 27.9 रुपये का उत्पाद शुल्क लगाया। डीलरों को 3.83 रुपये का कमीशन भी दिया गया। ये तीनों घटक मिलकर 85.27 रुपये प्रति लीटर हो गए। इस पर, दिल्ली सरकार ने 19.4 प्रतिशत का मूल्य वर्धित कर लगाया, जो कि 16.54 रुपये होता है। इसे भी जब हम जोड़ देते हैं, तो प्रति लीटर पेट्रोल की खुदरा कीमत 101.81 रुपये हो जाती है।

 

 

यह गणना हमें क्या बताती है?

एक अप्रैल को केंद्र सरकार का कर और दिल्ली सरकार का कर पेट्रोल के खुदरा मूल्य का लगभग 44 प्रतिशत था। यह अनुपात हर राज्य में अलग-अलग है। मुंबई का ही उदाहरण लीजिए। एक अप्रैल को शहर में पेट्रोल की कीमत 116.72 रुपये प्रति लीटर थी, जो दिल्ली की तुलना में लगभग 15 रुपये प्रति लीटर अधिक थी। इसका कारण सीधा है।

केंद्र के कर को छोड़ यहां पेट्रोल-डीजल पर टैक्स शून्य

महाराष्ट्र सरकार शहर में बेचे जाने वाले प्रत्येक लीटर पेट्रोल के लिए 26 प्रतिशत मूल्य वर्धित कर के साथ-साथ 10.12 रुपये अतिरिक्त शुल्क लेती है। इसलिए मुंबई में कुल Tax 50 रुपये प्रति लीटर से अधिक हो जाते हैं। राज्य सरकारों का कर अलग-अलग है और लक्षद्वीप व अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में Tax सबसे कम है, जहां यह क्रमश: 0 प्रतिशत और एक प्रतिशत है। इसके अलावा, पेट्रोल का जो सच है, वही डीजल का भी सच है।

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