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दाम घटाने के लिए सोयाबीन और सनफ्लावर ऑयल पर टैक्स घटा सकती है सरकार

केंद्र सरकार सोयाबीन और सनफ्लावर ऑयल (सूर्यमुखी का तेल) पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने पर विचार कर रही है। खाने-पीने की बढ़ती कीमतों में नरमी लाने के लिए सरकार की तरफ से किए जा रहे उपायों में यह एक और कदम होगा। मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के मुताबिक, सरकार यह विचार कर रही है कि एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डिवेलपमेंट सेस में कटौती की जाए या इसे खत्म किया जाए। एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डिवेलपमेंट सेस मौजूदा समय में 5 फीसदी है। इस मामले में फिलहाल फाइनेंस मिनिस्ट्री के प्रवक्ता की प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है। 

जरूरत का 60% खाद्य तेल इंपोर्ट करता है भारत
सरकार फार्म इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की खातिर फंड्स जुटाने के लिए एक्स्ट्रा लेवी का इस्तेमाल करती है। सरकार ने पॉम ऑयल और सोयाबीन ऑयल समेत ज्यादातर कुकिंग ऑयल्स पर पहले ही बेस इंपोर्ट ड्यूटी खत्म कर दी है। साथ ही, जमाखोरी रखने के लिए इनवेंटरी लिमिट्स लगाई है। भारत, अपनी जरूरत का करीब 60 फीसदी एडिबल ऑयल (खाद्य तेल) इंपोर्ट करता है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रही लड़ाई के कारण ब्लैक सी रीजन से सनफ्लावर ऑयल की सप्लाई बाधित हुई है, जिससे इंटरनेशनल प्राइसेज के साथ ही भारत में खाद्य तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। 

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 वैश्विक मंदी की चिंता, क्रूड ऑयल के प्राइसेज में गिरावट
इधर, ग्लोबल रिसेशन (वैश्विक मंदी) की चिंता के बीच मंगलवार को क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। एनालिस्ट्स का कहना है कि चीन के कई प्रमुख शहरों में जारी पाबंदियों ने भी मार्केट सेंटीमेंट पर असर डाला है। इंटरकॉन्टिनेन्टल एक्सचेंज में ब्रेंट का जुलाई कॉन्ट्रैक्ट 0.43 फीसदी की गिरावट के साथ 112.93 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर था। इसी तरह, NYMEX पर वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट 0.51 फीसदी गिरकर 109.73 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।

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