आम लोगों के लिए वाहन कबाड़ (स्क्रैपिंग) प्रक्रिया को और सुविधाजनक बनाने के लिए सरकार ने सरकार ने इसे डिजिटल करने का फैसला किया है। इसके तहत वाहन मालिकों को स्क्रैपिंग प्रमाणपत्र डिजिटल मिलेगा और इसकी ज्यादातर प्रक्रिया डिजिटल होगी। इसके लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन (पंजीकरण और वाहन स्क्रैपिंग फैसिलिटी संशोधन के कार्य) नियम, 2022 से संबंधित ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है।
डिजिटल वाहन स्क्रैपिंग के फायदे
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पिछले साल सितंबर में मोटर वाहन (पंजीकरण और वाहन स्क्रैपिंग फैसिलिटी के कार्य) नियम जारी किए गए थे। नया नोटिफिकेशन उसी का संशोधित रूप है। मंत्रालय के बयान में कहा गया कि यह संशोधन वाहन मालिकों, आरवीएसएफ ऑपरेटरों, डीलरों, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकारों जैसे सभी हितधारकों आदि के लिए वाहन स्क्रैपिंग की प्रक्रिया को सरल और डिजिटल बनाने के लिए किए गए हैं। इसका मकसद कारोबार में आसानी सुनिश्चित करने और आम लोगों के लिए प्रक्रियाओं को आसान और समयबद्ध बनाना है।
घर बैठे स्क्रैप के लिए आवेदन कर सकेंगे
संशोधित प्रावधान के तहत वाहन मालिकों को वाहन स्क्रैपिंग के लिए डिजिटल रूप से आवेदन करने की सुविधा है। स्क्रैप करने के लिए वाहन मालिकों को डिजिटल रूप से आवेदन करने में मदद के लिए, आरवीएसएफ सुविधा केंद्र के रूप में कार्य करेंगे। स्क्रैपिंग के लिए प्रस्तुत वाहन से संबंधित अधिक विवरण के लिए कई प्रमाणपत्र जमा करने होंगे। उक्त प्रमाण पत्र वाहन मालिकों को डिजिटल रूप से उपलब्ध होंगे और इनकी वैधता की अवधि दो वर्ष की होगी।
ब्लैकलिस्ट वाहन का आवेदन नहीं
वाहन मालिक द्वारा आवेदन जमा करने से पहले परिवहन विभाग के ‘वाहन’ डेटाबेस से की जाने वाली आवश्यक जांच को जोड़ा गया है। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों द्वारा वाहन को ब्लैकलिस्ट करने का कोई रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए। वाहन की खरीद, किराया या एग्रीमेंट से संबंधित प्रमाणपत्र होना चाहिए। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के रिकॉर्ड में वाहन के खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए। वाहन पर कोई बकाया नहीं होना चाहिए। संशोधित नियमों के मुताबिक इनमें से किसी भी जांच में विफल रहने वाले वाहनों के लिए आवेदन जमा नहीं किए जाएंगे।
वाहन उद्योग को मिलेगी रफ्तार
स्क्रैपिंग नीति से देश में वाहन उद्योग के साथ रोजगार को भी रफ्तार मिलेगी। भारतीय वाहन उद्योग सालाना टर्नओवर करीब 7.5 लाख करोड़ रुपये का है। इसे पांच साल में 15 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य है। स्क्रैपेज नीति से कच्चे माल की लागत में लगभग 40 फीसदी की कटौती होने की संभावना है। देश में लगभग 22 हजार करोड़ मूल्य के स्क्रैप स्टील का आयात किया जाता है। इस नीति से इसकी निर्भरता कम होगी।