भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने खाने-पीने के सामान की ऑनलाइन डिविलरी करने वाले मंचों स्विगी (Swiggy) और जोमैटो (Zomato) के खिलाफ जांच का आदेश दिया है। यह जांच दोनों मंचों पर लगे कथित अनुचित व्यापार व्यवहार को लेकर की जाएगी।
नियामक का कहना है कि प्रथमदृष्टया यह हितों के टकराव का मामला दिखाई देता है। ऐसे में इस मामले की विस्तृत जांच की आवश्यकता है। जोमैटो और स्विगी खाने-पीने के सामान की ऑनलाइन डिलिवरी करने वाली प्रमुख कंपनियां हैं। यह बाजार में अपनी मजबूत स्थिति के जरिए प्रतिकूल असर डाल सकती हैं और कामकाज के समान अवसरों को प्रभावित कर सकती हैं।
प्रतिस्पर्धा आयोग ने कहा कि जोमैटो और स्विगी के समझौतों में शामिल मूल्य समानता उपनियम कई अंकुशों की तरफ इशारा करते हैं। दरअसल, यह नियमों रेस्तरां भागीदार को अपने खुद के किसी भी चैनल के जरिए कम कीमत पर डिलिवरी से रोकते हैं। साथ ही भागीदार रेस्तरां ऑनलाइन मंच से ज्यादा छूट नहीं दे सकते हैं।
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आयोग ने यह भी पाया कि ये कंपनियां अपनी हिस्सेदारी और या राजस्व हितों वाले रेस्तरां भागीदारों को अन्य की तुलना में तरजीह देती हैं। सीसीआई ने कहा कि इस तरह का व्यवहार कई तरीकों से हो सकता है, जो प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकता हैं।
इन्होंने की शिकायत
भारतीय राष्ट्रीय रेस्तरां संघ (एनआरएआई) ने 2021 में सीसीआई से जोमैटो-स्विगी के अनुचित व्यापार व्यवहार की शिकायत की थी। एनआरएआईने दोनों कंपनियों के खिलाफ उनके रेस्तरां भागीदारों के साथ अनुचित तरीके से व्यापार करने का आरोप लगाया था। संघ ने दोनों कंपनियों पर खुद के निवेश वाले क्लाउड किचन को ज्यादा तरजीह देने का भी आरोप लगाया है।
60 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
सीसीआई ने इस मामले की जांच करने की जिम्मेदारी महानिदेशक जांच (डीजी) को सौंपी है। डीजी को 60 दिन में जांच करके अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
कोरोना से बढ़ी मांग
कोरोना महामारी के कारण देश में ऑनलाइन खाने-पीने का सामान मंगाने वालों की संख्या बढ़ी है। एक अनुमान के मुताबिक, इस समय खाने-पीने के सामान के रोजाना औसतन 20 से 25 लाख ऑर्डर किए जा रहे हैं।
क्या है क्लाउड किचन?
क्लाउड किचन एक ऐसा स्थान होता है जहां पर केवल खाना तैयार किया जाता है। क्लाउड किचन ऑनलाइन-ऑफलाइन ऑर्डर लेकर खाना तैयार करके डिलिवरी करते हैं। इनमें ग्राहकों के लिए बैठकर खाना खाने की सुविधा नहीं मिलती है। ग्राहक खुद भी इन किचन से अपने खाने का पार्सल एकत्र कर सकते हैं।
कुछ प्रमुख विवाद
10 मिनट में डिलिवरी: हाल ही में जोमैटो ने 10 मिनट में फूड डिलिवरी की नई सेवा जोमैटो इंस्टेंट शुरू की थी। इस सेवा को लेकर डिलिवरी कर्मचारियों के संगठन इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ट ट्रांसपोर्ट वर्कर्स ने सवाल उठाए थे।
भाषा की समस्या: इसी साल तमिलनाडु में जोमैटो ने एक ग्राहक को केवल हिन्दी ना जानने पर रिफंड नहीं देने से इनका कर दिया था। सोशल मीडिया में यह विवाद वायरल होने के बाद कंपनी ने माफी मांगी थी।शराब की डिलिवरी: अगस्त 2019 में स्विगी के डिलिवरी बॉय पर प्रतिबंध के बावजूद गुजरात में शराब की डिलिवरी का आरोप लगा था। इस मामले में वडोदरा पुलिस ने डिलिवरी बॉय को बीयर की छह बोतलों के साथ गिरफ्तार किया था।
कंपनी के बारे मेंजोमैटो: जोमैटो की स्थापना दीपेंद्र गोयल ने 2008 में में की थी। इसका मुख्यालय हरियाणा के गुरुग्राम में है। आज यह कंपनी भारत के साथ दुनियाभर के 24 देशों में सेवा देती है। 2021 में जोमैटो शेयर बाजारों में सूचीबद्ध हुई थी। जनवरी 2022 में इसका अनुमानित मूल्यांकन 9.5 अरब डॉलर आंका गया था।
स्विगी: स्विगी की स्थापना 2014 में हुई थी। इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है। इस समय यह देश के 100 से ज्यादा शहरों में फूड डिलिवरी करती है। कंपनी ने अब तक 4.8 अरब डॉलर का निवेश जुटाया है। जनवरी 2022 में स्विगी का अनुमानित मूल्यांकन 10.7 अरब डॉलर आंका गया था। कंपनी अपना आईपीओ लाने की योजना बना रही है।