भारत से लेकर जिम्बाब्वे (Zimababwe) तक, पूरी दुनिया इस समय कमरतोड़ मंहगाई से परेशान है। हर कोई अपने स्तर पर इस महंगाई को नियंत्रित करने के लिए फैसले ले रहा है। सोमवार को जिम्बाब्वे के सेन्ट्रल बैंक की तरफ से भी कठोर फैसला लिया गया है। जिम्बाब्वे के सेन्ट्रल बैंक के गवर्नर ने बढ़ती मंहगाई को नियंत्रित करने के लिए इंटरेस्ट रेट 200% बढ़ाने का फैसला किया है।
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इस बढ़ोतरी पर क्या बोले गवर्नर?
जिम्बाब्वे के गवर्नर ने कहा, ‘बढ़ती महंगाई को लेकर मौद्रिक समिति ने गहरी चिंता जाहिर की है। समिति ने कहा कि बढ़ती महंगाई ने कंज्यूमर्स डिमांड और कांफिडेंस पर गहरा प्रभाव डाला है। अगर इसे हम नियंत्रित नहीं करते हैं तो दो साल के इकोनाॅमिक ग्रोथ पर बुरा असर डालेगा।’ वहीं, सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए जिम्बाब्वे के वित्त मंत्री ने अगले पांच साल के यूएस डाॅलर को लीगल करने का फैसला किया है।
रूस और यूक्रेन युद्ध और कोविड-19 की वजह से लगे लाॅकडाउन सप्लाई चेन बुरी तरह से प्रभावित हुई है। जिससे कमोडिटी की कीमतों में उछाल देखने को मिली है। फूड, फ्यूल से लेकर दवा और फीस तक हर चीज का भुगतान करने के लिए अमेरिकी डाॅलर का बढ़ावा दिया है।
जून में महंगाई दर 191.6% रही
लगातार दूसरे महीने में वार्षिक मंहगाई दर तिहरे अंक में रही है। जून में महंगाई दर 191.6% रही। जोकि एक महीने पहले 131.7% थी। वहीं, इस साल ग्रीनबैक की तुलना में जिम्बाब्वे डाॅलर की कीमतों में 69% की गिरावट देखने को मिली है। करेंसी की गिरावट को रोकने के लिए जिम्बाब्वे सरकार की तरफ से दस दिन के लिए बैंक उधारी, स्टाॅक एक्सचेंज पर प्रतिबंध लगाने जैसे फैसले किए जा चुके हैं।