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छोटे शेयरों ने दिया 36.64 प्रतिशत का बड़ा रिटर्न, सेंसेक्स और निफ्टी को पीछे छोड़ा

बीते वित्त वर्ष 2021-22 में छोटे शेयरों (स्मॉलकैप) ने निवेशकों को 36.64 प्रतिशत का बड़ा रिटर्न दिया है। इस तरह छोटी कंपनियों के शेयरों ने प्रतिफल देने के मामले में सेंसेक्स और निफ्टी को पीछे छोड़ दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2022-23 में भी स्मॉलकैप का बेहतर प्रदर्शन जारी रहेगा। बीते वित्त वर्ष में बीएसई का स्मॉलकैप सूचकांक 7,566.32 अंक या 36.64 प्रतिशत चढ़ गया। वहीं मिडकैप में 3,926.66 अंक या 19.45 प्रतिशत की बढ़त रही। इसकी तुलना में सेंसेक्स वित्त वर्ष 2021-22 में 9,059.36 अंक यानी 18.29 प्रतिशत चढ़ा।

दूसरी छमाही में बाजार में भारी उतार-चढ़ाव

भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति की चिंता और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली से पिछले वित्त वर्ष के अंतिम महीनों में हालांकि बाजार को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। विश्लेषकों ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही बहुत अच्छी रही, जबकि दूसरी छमाही में बाजार को उतार-चढ़ाव से जूझना पड़ा।

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शीर्ष कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 2.61 लाख करोड़ रुपये बढ़ा

सेंसेक्स की शीर्ष 10 कंपनियों के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में बीते सप्ताह सामूहिक रूप से 2,61,767.61 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। शेयर बाजारों में तेजी के रुख के बीच सप्ताह के दौरान सबसे अधिक लाभ एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज को हुआ। बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,914.49 अंक या 3.33 प्रतिशत चढ़ गया।

समीक्षाधीन सप्ताह में एचडीएफसी बैंक का बाजार पूंजीकरण 41,469.24 करोड़ रुपये बढ़कर 8,35,324.84 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाजार मूल्यांकन में 39,073.7 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ और यह 17,95,709.10 करोड़ रुपये रहा।

एफपीआई ने 41,000 करोड़ रुपये निकाले

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने लगातार छठे महीने बिकवाली जारी रखते हुए मार्च में भारतीय शेयर बाजारों से 41,000 करोड़ रुपये की निकासी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल तथा मुद्रास्फीति की वजह से निकट भविष्य में भी एफपीआई के प्रवाह में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा।

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डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई ने पिछले महीने शेयर बाजारों से शुद्ध रूप से 41,123 करोड़ रुपये की निकासी की है। इससे पहले उन्होंने फरवरी में शेयर बाजारों से 35,592 करोड़ रुपये और जनवरी में 33,303 करोड़ रुपये निकाले थे। विदेशी निवेशक पिछले छह महीनों से शेयरों से निकासी कर रहे हैं। अक्टूबर, 2021 और मार्च, 2022 के बीच उन्होंने भारतीय बाजारों से शुद्ध रूप से 1.48 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं।

इस हफ्ते कैसी रहेगी बाजार की चाल

घरेलू मोर्चे पर वृहद आर्थिक आंकड़े, रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा और रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़े घटनाक्रम इस सप्ताह शेयर बाजारों की दिशा तय करेंगे। इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के रुख और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से भी बाजार की धारणा तय होगी।

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स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने कहा, इस सप्ताह भारतीय बाजारों के लिए रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति एक महत्वपूर्ण कारक होगी। यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि बीते वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में लगातार बिकवाली के बाद नए वित्त वर्ष में एफपीआई का रुख किस तरह का रहता है। हालांकि, पिछले सप्ताह उनके रुख में बदलाव आया है।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के उपाध्यक्ष-शोध अजित मिश्रा ने कहा कि नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ सभी की निगाहें आठ अप्रैल को रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति बैठक के नतीजों पर रहेंगी।

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