केंद्र सरकार घाटे में चल रही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को लेकर जल्द फैसला ले सकती है। भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन आने वाली इन कंपनियों के भविष्य को लेकर सरकार के बीच विचार-विमर्श जारी है।
मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इन कंपनियों बंद करने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा पुनर्गठन और विनिवेश पर भी चर्चा की जा रही है। हाल के दिनों में घाटे वाली कंपनियों की बिक्री में असफल रहने के बाद यह विचार-विमर्श शुरू किया गया है। एक अधिकारी के मुताबिक, मंत्रालय को कई सुझाव मिले हैं। इन सभी विकल्पों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
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29 में से सिर्फ छह कंपनियां मुनाफे में
सार्वजनिक उद्यम विभाग की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, भारी उद्योग मंत्रालय के तहत कुल 29 कंपनियां हैं। इसमें से 17 कंपनियों में कामकाज हो रहा है। इन 17 में से छह कंपनियां मुनाफे में हैं, जबकि 11 घाटे में चल रह हैं। शेष 12 कंपनियों में से पांच गैर-संचालन में हैं, जबकि सात कंपनियां बंद हो गई हैं। 29 में से कुल 14 कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही हैं।
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मुनाफे वाली कंपनियां
इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स (इंडिया) लिमिटेड, ब्रैथवेट, बर्न एंड जैसोप कंस्ट्रक्शन लिमिटेड, एचएमटी लिमिटेड, एचएमटी इंटरनेशनल लिमिटेड, रिचर्डसन एंड क्रूडास (1972) लिमिटेड और ब्रिज एंड रूफ कंपनी (इंडिया) लिमिटेड।