HomeShare Marketघरेलू शेयर बाजार से विदेशी निवेशक कर रहे किनारा, छोटे निवेशकों ने संभाला

घरेलू शेयर बाजार से विदेशी निवेशक कर रहे किनारा, छोटे निवेशकों ने संभाला

केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले दो वर्षों से डीमैट खाताओं को खोलने में आई तेजी का हवाला देते हुए कहा कि इस अवधि में खुदरा निवेशकों ने बाजार में मुख्य भूमिका निभाई है और दुनिया दिखा दिया है कि वह क्या कर सकते हैं और विदेशी निवेशकों के बगैर भी झटकों को झेलने वाला बन सकते हैं। सीतारणम ने कहा कि वर्ष 2019-20 में हर महीने चार लाख डीमैट खाते खुलते थे, लेकिन वर्ष 2020-21 में यह संख्या तीन गुना बढ़कर 12 लाख मासिक हो गई और वर्ष 2021-22 में तो यह 26 लाख मासिक पर पहुंच गई है।

ब्रोकरेज फर्म बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक घरेलू शेयरों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का स्वामित्व मार्च 2022 में घटकर 19.5 प्रतिशत पर आ गया जो पिछले तीन वर्षों में सबसे कम है। इसके पहले मार्च, 2019 में एफपीआई का स्वामित्व 19.3 प्रतिशत रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, साल-दर-साल आधार पर विदेशी कोषों की हिस्सेदारी मार्च, 2021 में 21.2 प्रतिशत के दूसरे सर्वोच्च स्तर पर थी।

दिसंबर, 2021 में विदेशी कोषों के पास घरेलू शेयरों का सर्वाधिक 21.4 फीसदी स्वामित्व रहा था। यह अनुपात दिसंबर, 2017 में पांच वर्षों के न्यूनतम स्तर 18.6 प्रतिशत पर रहा था। इस बीच एफपीआई ने चालू महीने यानी मई के पहले चार कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजारों से 6,400 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है। अप्रैल, 2022 तक लगातार सात महीने तक एफपीआई भारतीय बाजारों में शुद्ध बिकवाल रहे हैं और उन्होंने शेयरों से 1.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है।

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रेपो रेट में वृद्धि का समय हैरान करने वाला

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हाल में नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का फैसला नहीं, बल्कि इस निर्णय का समय हैरान करने वाला है। इसके साथ ही उन्होंने भरोसा जताया है कि कोष की लागत बढ़ने से सरकार के नियोजित बुनियादी ढांचा निवेश पर असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अप्रैल की शुरुआत में हुई पिछली एमपीसी बैठक में रिजर्व बैंक ने संकेत दिया था कि यह उनके लिए भी कदम उठाने का समय है।

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यह वृद्धि दुनियाभर के प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तरफ से की जा रही दर वृद्धि का ही एक हिस्सा है। वित्त मंत्री ने कहा, एक तरह से यह तालमेल में उठाया गया कदम था। ऑस्ट्रेलिया ने ऐसा किया और अमेरिका ने भी उसी दिन दरों में वृद्धि की। इस तरह मुझे आजकल केंद्रीय बैंकों के बीच अधिक समझ नजर आ रही है। लेकिन महामारी से उबरने के तरीके की समझ केवल भारत के ही लिए पूरी तरह से अनूठी या विशिष्ट नहीं है। यह एक वैश्विक मुद्दा है।

उन्होंने कहा, हमने उस पुनरुद्धार को संभाला लेकिन मुद्रास्फीति काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच रही थी। अमेरिका और ब्रिटेन में यह काफी ज्यादा था, हमारे देश में इतना नहीं। फिर भी पुनरुद्धार बनाम मुद्रास्फीति का मसला दुनियाभर में एक खास तरह से बढ़ता दिख रहा है। हालांकि, सीतारमण ने यह भरोसा जताया कि नीतिगत दर में बढ़ोतरी के बावजूद बुनियादी ढांचे में सरकार के अरबों डॉलर के निवेश पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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