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मोदी सरकार ने सभी एयरलाइंस कंपनियों से कहा कि हवाई किराए की स्व-निगरानी करने और उचित किराया सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र बनाने को कहा है। यह कदम हवाई किरायों में मनमानी बढ़ोतरी के मामले सामने आने के बाद उठाया गया है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोमवार को एयरलाइंस सलाहकार समूह के साथ बैठक में हवाई किराए में वृद्धि के मुद्दे पर चर्चा की। उन्होंने कुछ मार्गों पर असामान्य किराया वृद्धि की हालिया रिपोर्टों के बारे में अपनी चिंताओं को साझा किया और कंपनियों से कुछ चुनिंदा मार्गों पर किराए की स्व-निगरानी करने के लिए कहा, जिनमें हाल ही में काफी वृद्धि देखी गई है।
लगातार मिल रही हैं शिकायतें
बैठक के बाद मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार को गो-फर्स्ट एयलाइन के बंद होने के बाद आसमान छूते हवाई किराए के संबंध में कई शिकायतें मिल रही हैं। खासकर उन मार्गों पर जहां गो-फर्स्ट की सेवाएं थीं। गर्मी के चरम मौसम के दौरान, दिल्ली-लेह और श्रीनगर जैसे पर्यटक हॉटस्पॉट सेक्टर में दिल्ली वापसी का हवाई किराया लगभग 50,000 रुपये तक पहुंच गया है। यही नहीं, केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने बैठक में ओडिशा ट्रेन हादसे का भी जिक्र किया, जिसके बाद एयरलाइन कंपनियों द्वारा दक्षिणी राज्यों के प्रमुख हवाई मार्गों पर मनमानी तौर पर किराया बढ़ाने की शिकायतें मिली थीं।
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डीजीसीए करेगा निगरानी
बैठक के बाद मंत्रालय ने कहा कि उच्च आरबीडी (आरक्षण बुकिंग डिजाइनेटर) के भीतर उचित मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करने के लिए एयरलाइंस द्वारा एक तंत्र तैयार किया जाना चाहिए और इसकी निगरानी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) करेगा। साथ ही किसी भी आपदा के दौरान मानवीय स्थिति को देखते हुए हवाई टिकटों के मूल्य निर्धारण पर कड़ी निगरानी रखने की आवश्यकता है। गौरतलब है कि देश के एयरलाइन क्षेत्र के अविनियमन के बाद हवाई किराए बाजार संचालित होते हैं और सरकार द्वारा न तो स्थापित किए जाते हैं और न ही विनियमित किए जाते हैं। एयरलाइन मूल्य निर्धारण कई स्तरों (बाल्टी या आरक्षण बुकिंग डिज़ाइनर) में चलता है।