रूस-यूक्रेन युद्ध को करीब डेढ़ महीना हो चुका है। इससे दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं को तगड़ा झटका लगा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। युद्ध से बाधित आपूर्ति श्रंखला और महंगे कच्चे तेल ने अब हर तबके पर असर डालना शुरू कर दिया है। बीते दो महीने में खेती से लेकर खाने-पीने के सामान पर महंगाई का असर दिखने लगा है।
महंगे फर्टिलाइजर से सब्सिडी खर्च बढ़ेगा
रूस, यूक्रेन और बेलारूस फर्टिलाइजर्स के बड़े उत्पादक हैं, लेकिन युद्ध के कारण इनकी आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस कारण फर्टिलाइजर्स की कीमत बढ़ी है।
संबंधित खबरें
महंगे खाद्य तेल ने रसोई की लागत बढ़ाई
रूस और यूक्रेन खाद्य तेलों के बड़े आपूर्तिकर्ता है। युद्ध की वजह से इनकी आपूर्ति नहीं हो रही है। ऐसे में सभी खाद्य तेलों के दाम बढ़ रहे हैं। हालांकि, सरसों तेल राहत दे रहा है।
मई में और सताएगी कच्चे तेल की गर्मी, पेट्रोल-डीजल के सस्ते होने की उम्मीद कम
हर वर्ग पर भारी पड़ रहा महंगा कच्चा तेल
युद्ध के कारण कच्चा तेल उच्च स्तर पर चल रहा है। अब यह घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ा रहा है। इससे माल ढुलाई समेत हर वर्ग की जेब पर बोझ बढ़ा है।
10 रुपये से ज्यादा महंगे हुए पेट्रोल-डीजल 18 दिन में
महंगे कच्चे माल से ऑटो-रियल्टी सेक्टर परेशान
युद्ध के कारण पैदा हुई महंगाई से घर बनाने से लेकर वाहन निर्माण तक के कच्चे माल की कीमत बढ़ गई है। वाहन निर्माता कंपनियां दाम बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं।