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कच्चे तेल के दाम गिरने के बावजूद दिल्ली में पेट्रोल 100 और मुंबई में 115 के पार

चुनाव बाद पेट्रोल-डीजल के दाम सातवीं बार बढ़े हैं। आज यानी मंगलवार को  इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल और राजस्थान में डीजल 100 के पार चला गया है। पेट्रोल की कीमतों में 80 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई है। वहीं, डीजल की कीमत में मंगलवार को 70 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। मुंबई में पेट्रोल 115.04 रुपये तो डीजल 99.25 रुपये हो गया है। कोलकाता में पेट्रोल 109.68 रुपये तो डीजल 94.62 रुपये पर पहुंच गया है।

2 नवंबर 2021 को दिल्ली में पेट्रोल 110.04 रुपये प्रति लीटर और डीजल  98.42 रुपये पर पहुंचा था। ये कीमतें सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गईं थीं। इसकी वजह से केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कमी करने को मजबूर हुई और पेट्रोल पर 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर उपभोक्ताओं को राहत दी गई।

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इसके बाद कई राज्यों ने भी मूल्य वर्धित कर यानी वैट को कम किया। लगभग एक महीने बाद दिल्ली सरकार ने 2 दिसंबर को पेट्रोल पर वैट घटाकर 8.52 रुपये प्रति लीटर कर दिया, जिससे पंप पर पेट्रोल की कीमत 100 रुपये से नीचे आ गई। तब से दिल्ली में पेट्रोल 95.41 रुपये प्रति लीटर और डीजल 86.67 रुपये प्रति लीटर था और यह रेट विधानसभा चुनाव के बाद 21 मार्च तक रहा।

 

मंगलवार को ब्रेंट 110 डॉलर प्रति बैरल से नीचे

बता दें  इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और तेल मंत्रालय ने ऑटो ईंधन दरों को बढ़ाने की आवश्यकता पर एक ईमेल प्रश्न का जवाब नहीं दिया, हालांकि शुक्रवार से कच्चे तेल के आयात की उनकी औसत लागत में भारी गिरावट आई है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड जो शुक्रवार को 120.65 डॉलर प्रति बैरल पर चढ़ गया था, सोमवार को 8.17 डॉलर गिरकर 112.48 डॉलर पर आ गया। गिरावट का सिलसिला अगले दिन भी जारी रहा। इंट्राडे ट्रेड के दौरान मंगलवार को ब्रेंट 110 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गया।

 

भारत 85% कच्चे तेल का आयात करता है। चीन में कोरोना वायरस के बढ़ने और शंघाई में लॉकडाउन की खबरों के कारण मांग की चिंताओं के कारण इसकी औसत आयात लागत में भी उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि कच्चे तेल की इंडियन बास्केट की कीमत सोमवार को 414.29 रुपये प्रति बैरल या 4.61% घटकर 8,572.06 रुपये प्रति बैरल हो गई, जो गुरुवार को 8,986.35 रुपये थी।

 


 

राजस्व नुकसान की वसूली कर रहीं कंपनियां

तेल विपणन कंपनियां कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के लाभों को तुरंत ग्राहकों को देने में सक्षम नहीं हो सकती हैं, क्योंकि वे पिछले राजस्व नुकसान की वसूली कर रहे । दो जानकारों ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए कहा कि राज्य द्वारा संचालित ईंधन विपणक और तेल मंत्रालय ने इस मामले पर एक प्रश्न का उत्तर नहीं दिया।

 

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां ईंधन खुदरा बाजार का लगभग 90% नियंत्रित करती हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के साथ 4 नवंबर से 137 दिनों के लिए पेट्रोल और डीजल की दरों में दैनिक परिवर्तन को रोक दिया था। फ्रीज के दौरान, अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतें 7 मार्च को 139.13 डॉलर प्रति बैरल के शिखर पर पहुंच गईं, जो मतदान का आखिरी दिन था। 10 मार्च को चुनाव परिणाम घोषित किए गए और 22 मार्च से ईंधन की कीमतें बढ़ने लगीं।

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