ऐप से कर्ज देने वाले मंचों में कई अनधिकृत और अवैध हैं। डिजिटल कर्ज ऐप के कुछ परिचालकों द्वारा कर्ज लेने वालों के उत्पीड़न के कारण उनके बीच कथित रूप से आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि केंद्रीय बैंक जल्द ही ऐप से कर्ज देने वालों (डिजिटल ऋण मंचों) के लिए नियामकीय रूपरेखा लेकर आएगा।
अगर विप्रो के शेयर में लगाए होते 10,000 रुपये तो आज होते 899 करोड़ के मालिक
दास ने भारतीय व्यापार (अतीत, वर्तमान और भविष्य) विषय पर एक व्याख्यान देते हुए कहा, मुझे लगता है कि बहुत जल्द हम एक व्यापक नियामकीय ढांचे के साथ सामने आएंगे, जो डिजिटल मंचों के जरिये ऋण देने के संबंध में हमारे सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने में सक्षम होगा। इन मंचों में कई अनधिकृत और बिना पंजीकरण के चल रहे हैं। मुझे कहना चाहिए कि ये अवैध हैं।
इस व्याख्यान का आयोजन आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम के तहत केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने किया था। गवर्नर ने कहा कि आरबीआई आर्थिक प्रगति के लिए मौजूदा और उभरते व्यवसायों की भूमिका को मान्यता देता है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यवसाय की दीर्घकालिक सफलता सीधे तौर पर उसके कामकाज की गुणवत्ता, आंतरिक नियंत्रण प्रणाली और जोखिम नियंत्रण की मजबूती तथा संगठनात्मक संस्कृति से जुड़ी होती है।
संबंधित खबरें
क्या है फिनटेक
वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनी (फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी) को आम बोलचाल में फिनटेक कहते हैं। यह वित्तीय क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटीलेजेंस (एआई) का इस्तेमाल कर कारोबार करती हैं। खर्च कम रखने के लिए यह ज्यादातर ऐप के जरिये काम करती हैं। यह दो तरह की होती हैं। पहली श्रेणी पंजीकृत फिनेटक की होती है जो सरकार और नियामक से मंजूरी के बाद कारोबार करती हैं और इनका पता होता है। वहीं दूसरी वैसी फिनेटक हैं जो बिना किसी मंजूरी के कारोबार कर रही होती हैं और इनको कोई पता नहीं होता है।
कई ग्राहकों ने ऐसी फिनटेक से तंग आकर आत्महत्या कर ली
बिना किसी दस्तावेज के एक घंटे में कर्ज देने का दावा करने वाली अवैध फिनटेक ग्राहकों को पहले आसान कर्ज देते हैं। इसके बाद एआई के इस्तेमाल से ग्राहक को मोबाइल और ईमेल से उसके रिश्तेदारों और दोस्तों के फोन नंबर निकाल लेते हैं। यदि ग्राहक ईएमआई देने में चूक करता है तो ग्राहक को तुरंत कर्ज चुकाने को कहते हैं और ऐसा नहीं करने पर उसके रिश्तेदारों को बताने की धमकी देते हैं। देश में कई ऐसे मामले आ चुके हैं, जिनमें कई ग्राहकों ने ऐसी फिनटेक से तंग आकर आत्महत्या कर ली।
यहां कर सकते हैं शिकायत
आरबीआई की वेबसाइट पर उन ऐप की एक सूची है, जो उसके साथ पंजीकृत हैं। रिजर्व बैंक के नियामकीय दायरे में आने वाले किसी भी वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत https://sachet.rbi.org.in/ लिंक पर जाकर सकते हैं। साथ ही शिकायत को ट्रैक भी कर सकते हैं।
ऐप आरबीआई के साथ पंजीकृत है या नहीं
दास ने बुधवार को कहा था कि इस तरह के ऐप का उपयोग करने वाले सभी लोगों से मेरा विनम्र अनुरोध है कि पहले यह जांच लें कि ऐप आरबीआई के साथ पंजीकृत है या नहीं। अगर ऐप पंजीकृत है, तो मैं आपको आश्वासन देता हूं केंद्रीय बैंक किसी भी गलत काम के मामले में तुरंत कार्रवाई करेगा। गवर्नर ने यह भी स्पष्ट किया कि आरबीआई के यहां पंजीकृत नहीं होने पर संबंधित ऐप या फिनटेक की शिकायत स्थानीय पुलिस में की जा सकती है।