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ईरान ने भारत से इंपोर्ट किए जाने वाली चाय और बासमती चावल के नए कॉन्ट्रैक्ट पिछले हफ्ते से पूरी तरह बंद कर दिए हैं। अचानक खरीदारी बंद किए जाने को लेकर ईरान के बायर्स की तरफ से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। वहीं, भारतीय एक्सपोर्टर्स का मानना है कि एंटी-हिसाब मूवमेंट के कारण ईरान में ज्यादातर दुकानें, होटल्स और मार्केट्स बंद हैं, शायद इसी वजह से ईरान ने खरीदारी बंद की है। यह बात इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में कही गई है।
साल में 30-35 मिलियन किलो चाय का इंपोर्ट करता है ईरान
कारोबार से जुड़े एक वर्ग का मानना है कि ईरान के इंपोर्टर्स शायद इस वजह से खरीदारी में देरी कर रहे हैं, क्योंकि नई दिल्ली और तेहरान एक रूपी ट्रेड सेटलमेंट एग्रीमेंट पर काम कर रहे हैं। हालिया डिवेलपमेंट का इन कमोडिटीज (चाय और बासमती) के एक्सपोर्ट पर सीधा असर पड़ेगा। एक्सपोर्टर्स का कहना है कि ईरान साल भर में भारत से करीब 30-35 मिलियन किलोग्राम अर्थोडॉक्स टी और 1.5 मिलियन किलोग्राम बासमती चावल का इंपोर्ट करता है।
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‘अचानक से क्यों बंद हो गई खरीदारी, कोई स्पष्टता नहीं’
ईरान को बड़े पैमाने पर चाय का एक्सपोर्ट करने वाली फर्म भंसाली एंड कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर अनीश भंसाली का कहना है कि ईरान को टी एक्सपोर्ट पहले ही घट गया था, बायर्स ने पिछले हफ्ते से नए कॉन्ट्रैक्ट रजिस्टर करना बंद कर दिया है। उन्होंने बताया कि अचानक से ऐसा क्यों हुआ, इसको लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। हमने इस बारे में ईरान के बायर्स से पूछा, लेकिन उनके पास कोई स्पष्ट उत्तर नहीं था। भंसाली ने बताया, ‘हमने टी बोर्ड को इसके बारे में सूचित कर दिया है और इस पूरे मामले में कुछ स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं।’
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बासमती एक्सपोर्टर्स को भी ऐसी ही समस्या का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन उन पर असर थोड़ा कम है, क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से दुनिया भर में बासमती चावल की डिमांड बढ़ी है। साथ ही, इसके प्राइसेज में भी तेजी आई है।