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आटा, मैदा और सूजी के निर्यात पर भी लगी रोक, मोदी सरकार के इस कदम से कम पड़ेगी महंगाई की मार

मई में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के बाद अब सरकार ने आटा, मैदा, सूजी के निर्यात पर भी रोक लगा दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल के गत सप्ताह पारित इस आदेश को जारी करते हुए विदेश व्यापार महानिदेशालय ने कहा कि यह कदम इन वस्तुओं की कीमतों में काबू पाने के लिए उठाया गया है। फिर भी कुछ मामलों में भारत सरकार की अनुमति के साथ इन वस्तुओं के निर्यात की अनुमति दी जाएगी।

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अधिसूचना के अनुसार अब अंतर-मंत्रालय समिति से आटा के अलावा मैदा, समोलिना (रवा/सिरगी), होलमील आटा के निर्यात के लिए भी मंजूरी लेने की जरूरत होगी। सूजी में रवा और सिरगी भी शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि विदेश व्यापार नीति 2015-20 के खास प्रावधान इस अधिसूचना के तहत लागू नहीं होंगे।

आटा निर्यात में 200% की बढ़ोतरी

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आकड़ों के अनुसार अप्रैल 2022 से जुलाई 2022 के दौरान 2021 की इसी अवधि की तुलना में भारत से गेहूं के आटे के निर्यात में 200% की बढ़ोतरी देखी गई है। 2021-22 में भारत ने 246 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का गेहूं के आटे का निर्यात किया है। वहीं वर्तमान वित्त में अप्रैल से जुलाई के बीच में ही आटे का निर्यात 128 मिलियन डॉलर रहा।

आटा का दाम औसतन 17% बढ़ा

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार 22 अगस्त को भारत में गेहूं का औसत खुदरा दाम 31.04 रुपए प्रति किलोग्राम रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 22% अधिक है। एक साल पहले इसी अवधि में गेहूं 25.41 रुपए प्रति किलो ग्राम था। वहीं गेहूं के आटे के दाम में औसतन 17% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गेहूं का आटा 35.17 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया है, जो पहले 30.04 रुपए था।

फसल उत्पादन में गिरावट

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 2021-22 में फसल के उत्पादन में 3% की गिरावट आई है, जिसके कारण थोक व खुदरा मार्केट में गेहूं की कीमते बढ़ी हैं। वहीं उद्योग मंडल रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ने गेहूं की अनुपलब्धता और कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चिंता जताई है।

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