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अनिल अंबानी के हाथ से निकली दिग्गज कंपनी, खरीदने वाले के शेयर बने तूफान

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Swan Energy deal: तेल एवं गैस, कपड़ा, रियल्टी जैसे क्षेत्रों में काम कर रही स्वान एनर्जी ने रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग का औपचारिक रूप से प्रबंधन नियंत्रण अपने जिम्मे ले लिया है। कंपनी ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत सफल बोलीदाता के रूप में उभरी थी। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण की तरफ से नियुक्त निगरानी समिति ने कर्जदाताओं की समिति की मंजूरी से कंपनी का प्रबंधन नियंत्रण स्वान एनर्जी को सौंप दिया है।

मैनेजमेंट का गठन
स्वान एनर्जी ने अपने प्रबंध निदेशक निखिल मर्चेंट को कार्यकारी निदेशक और परेश मर्चेंट तथा भविक मर्चेंट को रिलायंस नेवल के निदेशक मंडल के सदस्य के रूप में शामिल करते हुए एक निदेशक मंडल का गठन किया है। यह रिलायंस नेवल के संचालन के लिए शीर्ष प्रबंधन संरचना स्थापित करने की योजना को अंतिम रूप देगा।

2100 करोड़ रुपये की बोली
बता दें कि स्वान एनर्जी की विशेष उद्देश्यीय इकाई हैजल इन्फ्रा ने रिलायंस नेवल के लिए 2,100 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। हैजल इन्फ्रा में स्वान एनर्जी की 74 प्रतिशत हिस्सेदारी है। शेष 26 प्रतिशत हिस्सेदारी हैजल मर्केंटाइल के पास है। इसमें स्वान एक रणनीतिक निवेशक है। रिलायंस नेवल के अधिग्रहण के साथ कंपनी पोत निर्माण, पोत मरम्मत आदि के क्षेत्र में दस्तक देने जा रही है।

स्वान एनर्जी के शेयर का हाल
सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को स्वान एनर्जी के शेयर में उछाल आया। यह शेयर 525.90 रुपये पर बंद हुआ। एक दिन पहले के मुकाबले शेयर में 6 फीसदी तक की तेजी देखी गई। शेयर ने ट्रेडिंग के दौरान 533 रुपये के 52 वीक हाई को टच किया। बता दें कि रिलायंस नेवल के शेयरों की ट्रेडिंग लंबे समय से बंद है। रिलायंस नेवल, अनिल अंबानी की कंपनी थी। इसके जरिए अनिल अंबानी ने डिफेंस सेक्टर में कदम रखा था। हालांकि, कंपनी भारी कर्ज की वजह से दिवालिया हो गई और अब अनिल अंबानी के हाथ से निकलकर स्वान एनर्जी के पास चली गई है।

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