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Adani Group: हिंडनबर्ग रिपोर्ट की वजह से मार्च तिमाही के दौरान अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई। इसी अवधि में समूह की कंपनी-अडानी पोर्ट्स एंड एसईजेड में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) में उछाल आया है। कंपनी के शेयरहोल्डिंग पैटर्न से पता चलता है कि जीक्यूपी पार्टनर्स के निवेश की बदौलत मार्च तिमाही में संस्थागत श्रेणी में FPI के पास 38,85,97,716 शेयर या 17.99 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।
इससे पहले दिसंबर 2022 की तिमाही में FPI की हिस्सेदारी 13.76 प्रतिशत, सितंबर तिमाही में 14.33 प्रतिशत और जून तिमाही में 14.24 प्रतिशत थी। कहने का मतलब है कि बीते कई तिमाही के मुकाबले जनवरी-मार्च 2023 की अवधि में FPI की हिस्सेदारी ज्यादा थी। बता दें कि दिसंबर 2019 की तिमाही में FPI की 18.72 फीसदी हिस्सेदारी रही थी। इस लिहाज से मार्च तिमाही की हिस्सेदारी कम है।
जीक्यूपी पार्टनर्स बड़ा खरीदार
राजीव जैन की अमेरिका स्थित वैश्विक इक्विटी निवेश फर्म जीक्यूपी पार्टनर्स ने मार्च तिमाही में अडानी पोर्ट्स के 88,600,000 शेयर 5,282 करोड़ रुपये में खरीदे थे। यह अडानी पोर्ट्स की हिस्सेदारी का 4.1 प्रतिशत हिस्सा है। बता दें कि फर्म में प्रवर्तक समूह की हिस्सेदारी 65.13 प्रतिशत से घटकर 61.03 प्रतिशत रह गई है।
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एलआईसी से चलाई कैंची
भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने अडानी पोर्ट्स में अपनी हिस्सेदारी मार्च तिमाही में 4.43 प्रतिशत से घटाकर 19.70,000 शेयर कर दी, जबकि दिसंबर तिमाही में यह 26,194 शेयर या 9.12 प्रतिशत थी।
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शेयर का हाल
इस खबर के बीच, सोमवार को अडानी पोर्ट्स के शेयर में उछाल आया। यह शेयर 651.90 रुपये पर बंद हुआ। एक दिन पहले के मुकाबले शेयर में 1.57% की तेजी आई है।